गोपालगंज(GOPALGANJ): यूपी सीमा से सटे बिहार जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ पुलिस की सख्ती अब अधिकार क्षेत्र की लड़ाई बन गई है। जिले में प्रशासनिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। चेकपोस्ट पर ट्रक चालकों से अवैध वसूली के आरोप में पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने प्रवर्तन अवर निरीक्षक (एमवीआई) को रंगे हाथों पकड़कर जेल भेज दिया। लेकिन यह कार्रवाई जिलाधिकारी (डीएम) को नागवार गुजरी और मामला अब पटना के ट्रांसपोर्ट मुख्यालय तक पहुंच चुका है।
जानकारी के मुताबिक, चेकपोस्ट पर लंबे समय से ट्रक चालकों से लाखों रुपये की अवैध वसूली का सिलसिला चल रहा था। स्थानीय ट्रक चालकों की शिकायत पर एसपी ने छापेमारी की और एमवीआई को मौके पर गिरफ्तार कर लिया। एसपी का दावा है कि यह कार्रवाई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रक्रिया (एसओपी) के अनुरूप है और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का एक कदम है।
हालांकि, डीएम ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन बताते हुए कड़ा विरोध जताया। उनका कहना है कि ऐसी गिरफ्तारी परिवहन विभाग के नियमों के विरुद्ध है और एसपी ने बिना उनके आदेश के कदम उठाया। इस विवाद ने पुलिस और प्रशासन के बीच खाई पैदा कर दी है। पुलिस महकमा एसपी की ईमानदार छवि का समर्थन कर रहा है, जबकि प्रशासनिक अफसर एसओपी की व्याख्या पर सवाल ठोक रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह चेकपोस्ट ‘कमाई का अड्डा’ बन चुका था, जहां पोस्टिंग के लिए बोली लगती थी। एसपी की कार्रवाई से कई हित प्रभावित हुए हैं, जिससे विवाद भड़क गया। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर स्तर पर अब इसकी जांच चल रही है।
बड़ा सवाल: भ्रष्टाचार पर प्रहार या अधिकार क्षेत्र की जंग? बिहार में अफसरशाही की यह लड़ाई सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर रही है। क्या पटना से कोई फैसला आएगा जो भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाए?
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

