नालंदा(NALANDA): इन दिनों जहां पूरे हिंदुस्तान में हिंदू मुसलमान की लड़ाई देखने को मिल रही है वही नालंदा जिले के बेनपुर प्रखंड के मारी गांव एक मिसाल पेश कर रहा है गंगा जमुना तहजीब का ,बिहार के नालंदा जिले के बेनपुर प्रखंड के मारी गांव में एक ऐसी मस्जिद है जिस मस्जिद में आजान से लेकर नमाज और साफ सफाई तक की व्यवस्था हिंदू समुदाय के लोग करते हैं…
है ना आश्चर्य की बात आपको यकीन नहीं हो रहा होगा लेकिन मैं बता रहा हूं इस मस्जिद में आजान भी दी जाती है पांच वक्त, जब के पुरे गांव में एक भी मुस्लिम आबादी नहीं है एक भी मुसलमानों का घर नहीं है इसके बावजूद इस मस्जिद की रंग रंगाई साफ सफाई भी होती है पांच टाइम आजान भी पड़ता हैजी हां ऐसी बात नहीं है कि यहां मुसलमान नहीं रहते थे गांव वाले बताते हैं कि मुसलमान की आबादी करीब २५० घरों की थी , लेकिन 1982 के बाद मुसलमान ने इस गांव को दूसरी जगह काम करने के कारण छोड़ना शुरू कर दिया और जैसा कि गांव वाले बताते हैं कि गांव के मुसलमान अपने जमीन जायदाद को यहीं के जान पहचान वालों को दान में देकर चले गए करीब 200 साल पुरानी मस्जिद देखने में ही नजर आती है काफी पुरानी मस्जिद है तब यहां के हिंदू परिवारों ने बीड़ा उठाया कि इस मस्जिद में आजान होनी चाहिए क्योंकि यह हमारे मुस्लिम भाइयों की एक निशानी है क्योंकि इस गांव में हिंदू मुसलमान हमेशा मिलकर रहे कभी किसी तरह का कोई फसाद नहीं हुआ लेकिन हिंदू भाई आजान देना नहीं जानते थे तो उन्होंने एक मुसलमान से पेन ड्राइव में आजान को रिकॉर्ड करवाया मस्जिद में मशीन लगवाई एमप्लीफायर साउंड बॉक्स लगाए और पांच वक्त जो अजान का टाइम होता है उस पेन ड्राइव को मशीन में लगाकर अजान बजाने लगे जिससे आजान की आवाज पुर गांव में गूंजने लगी, आज ये कौमी एकता की मिशाल बन गई है…
आपको बता दूं की हिंदू भाइयों को मस्जिद पर इतनी ज्यादा यकीन है कि वह कोई भी शुभ कार्य की शुरुआत मस्जिद में आने के बाद ही करते हैं ,अगर किसी हिंदू के घर में शादी है तो शादी का कार्ड सबसे पहले मस्जिद का दरवाजे पर रखा जाता है उसके बाद ही परिवार में उसे बांटा जाता है इस गांव में लगभग 18 तरह की जातियां हैं जैसा कि गांव के लोगों ने बताया और सभी जातियों के कुछ-कुछ लोगों ने हर साल मस्जिद को रंगा पुताई का जिम्मा ले रखा है और रोज एक टाइम गांव के कुछ लड़के आकर इस मस्जिद की साफ सफाई करते हैं इस मस्जिद में कुछ मजार भी है जो कहा जाता है की मस्जिद के देखरेख जो पुराने जमाने के लोग करते हैं वैसे लोगों की मृत्यु हो जाती है तो उनको यही दफन कर दिया जाता है इस मस्जिद में एक पत्थर का टुकड़ा भी है बहुत बड़ा जिसकी मानयता है कि अगर गांव में कोई आदमी बीमार पड़ जाता है तो इस पत्थर पर पानी देकर रगड़ता है और उससे लेप बनाकर पूरे बदन पर लगाने के बाद उसकी बीमारी दूर हो जाती है,,गांव के लोगों ने बताया कि 1982 के बाद इस गांव में एक भी मुस्लिम आबादी नहीं है उसके बावजूद आज तक यह मस्जिद सही सलामत है अपने अस्तित्व में है साफ सुथरा है और यह रोज आजान होती है इस बात का सबूत है कि हम लोग गंगा जमुनी तहजीब को जिंदा रखे हुए हैं जरूरत है देश के लोगों को इस बात से सीख लेने की की राजनीति के चक्कर में पड़कर अपना रिश्ता खराब ना करें..
NEWS ANP के लिए नालंदा ब्यूरो के साथ पटना से एस आलम की रिपोर्ट..

