बिहार(BIHAR): भारत सरकार की बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरुआत के बाद जिला प्रशासन ने जन निर्माण केंद्र के सहयोग से बुधवार को रैलियों व शपथ ग्रहण कार्यक्रमों का आयोजन किया। डीएम विशाल राज ने जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दिलवाया। जन निर्माण केंद्र बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम कर रहे 250 से भी ज्यादा गैरसरकारी संगठनों के देशव्यापी गठबंधन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के सहयोगी संगठन हैं।
जिला प्रशासन ने बाल विवाह के खिलाफ काम कर रहे गैरसरकारी संगठन जन निर्माण केंद्र के साथ मिलकर जागरूकता रैलियों का आयोजन किया और लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई। इस मौके पर समाहरणालय परिसर में हुए समारोह में डीएम विशाल राज ने स्कूली बच्चों, महिलाओं और पंचायत प्रतिनिधियों व अन्य को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई। जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निर्देशक के द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शपथ के बाद जन जन जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया गया। जिले में जगह-जगह हुए कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, बाल विवाह निषेध अधिकारी के अलावा बाल विवाह पीड़िताओं ने भी भागीदारी की और बाल विवाह के खिलाफ शपथ ली। इस मौके पर बाल विवाहों की सूचना व शिकायत के लिए एक राष्ट्रीय पोर्टल भी शुरू किया गया।साथ ही जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाते हुए डीएम विशाल राज ने बाल विवाह मुक्त अभियान को प्रोत्साहित किया। इस राष्ट्रव्यापी अभियान और जमीन पर इसके असर की चर्चा करते हुए के जन निर्माण केंद्र निदेशक राकेश कुमार सिंह ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बाल विवाह के खात्मे के लिए महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय की ओर से शुरू किया गया अभियान इस बात का सबूत है कि सरकार इस सामाजिक बुराई की गंभीरता से अवगत है। आज भी देश में 23 प्रतिशत से ज्यादा लड़कियों का बाल विवाह होता है जो न सिर्फ जीवनसाथी चुनने के उनके अधिकार का हनन है बल्कि इससे लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ रोजगार और आर्थिक निर्भरता की उनकी संभावनाओं पर भी बेहद बुरा असर होता है। सरकार की योजना इस अभियान में सभी हितधारकों को साथ लेकर चलने की है। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज के साझा प्रयासों से भारत 2030 से पहले ही बाल विवाह मुक्त हो जाएगा।
NEWSANP के लिए बिहार से ब्यूरो रिपोर्ट

