कौन थे बाबा साहेब?
भारत रत्न और महापरिनिर्वाण दिवस
दिल्ली(DELHI): भारतीय संविधान के शिल्पकार, सामाजिक न्याय के अग्रदूत और करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती अब पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाई जायेगी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला लेते हुये 14 अप्रैल को राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर दिया। इस घोषणा के बाद पूरे देश में बाबा साहेब के अनुयायियों में खुशियां है। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस फैसले की जानकारी साझा करते हुये लिखा, “संविधान निर्माता, समानता के संदेशवाहक और करोड़ों लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती अब सार्वजनिक अवकाश के रूप में मान्य होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने यह निर्णय लेकर देश की भावनाओं का सम्मान किया है।” इस निर्णय को लेकर आदेश जारी कर दिया गया है।
कौन थे बाबा साहेब?
डॉ. भीमराव अंबेडकर, जिन्हें उनके अनुयायी श्रद्धा से “बाबा साहेब” कहते हैं, का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। वे न केवल संविधान सभा के प्रमुख वास्तुकार थे, बल्कि उन्होंने भारत में समानता, सामाजिक न्याय और दलितों के अधिकारों के लिये आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने शिक्षा, राजनीति, समाज और कानून के क्षेत्र में जो योगदान दिया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
भारत रत्न और महापरिनिर्वाण दिवस
बाबा साहेब नौ भाषाओं के ज्ञाता थे और उन्हें उस्मानिया विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले भारतीय होने का गौरव भी प्राप्त है। उनके निधन के बाद, भारत सरकार ने उन्हें 1990 में मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया। हर साल 6 दिसंबर को उनकी पुण्यतिथि को ‘महापरिनिर्वाण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जब देशभर में उनके अनुयायी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.
NEWSANP के लिए दिल्ली से ब्यूरो रिपोर्ट

