आसनसोल(ASANSOL): पश्चिम बंगाल में सरस्वती पूजा सिर्फ विद्या की आराधना नहीं, बल्कि युवाओं के लिए प्यार, दोस्ती और रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए एक खास दिन भी है। इस दिन को युवा एक दूसरे मे अपनापन और पहली मोहब्बत को महसूस करने का प्रयास करते हैं, यही वजह है कि पश्चिम बंगाल में इसे अक्सर ‘बंगाली वैलेंटाइन डे’ कहा जाता है। सरस्वती पूजा के दिन छात्र-छात्राएं अपने किताब-कॉपी देवी के सामने अर्पित कर आशीर्वाद लेते हैं। इसके बाद पूरा दिन उनके लिए खुला होता है। स्कूल और कॉलेज खुले रहते हैं, लेकिन माहौल पढ़ाई वाला नहीं होता। पारंपरिक कपड़ों में सजे युवा, दोस्तों के साथ घूमते नजर आते हैं और कई बार यही दिन पहली डेट का भी गवाह बन जाता है। बसंत पंचमी का रंग पीला माना जाता है और बंगाल में यह रंग हर तरफ दिखाई देता है। लड़कियां साड़ी में और लड़के कुर्ता-पायजामा पहनकर पंडालों में घूमते हैं। कई युवा जोड़े एक जैसे रंग के कपड़ों में हाथों में हाथ डाले चलते दिखते हैं। यह नज़ारा इस दिन को और भी खास बना देता है। जिसकी एक झलक आसनसोल के रबिन्द्र भवन मे स्थित कॉफी हॉउस, शताब्दी और नेहरू पार्क सहित सेन्ट्रम और गलेक्सी मॉल मे देखने को मिला, जहाँ सुबह से ही युवाओं का हुजूम कुछ इस कदर उमड़ा था की वह हुजूम रात को करीबन 8 से 9 बजे तक चला, जहाँ युवा एक दूसरे को लाल गुलाब और विभिन्न प्रकार उपहार देते हुए नजर आए, यह नजर देखने वाले लोगों की अगर माने तो इन युवाओं के दिलों मे एक दूसरे के लिये जगी प्रेम की पहली सीढ़ी है, जिस सीढ़ी पर चढ़कर युवा अपनी प्रेम की अगली परिभाषा लिखेंगे, वह परिभाषा जो उनके जीवन की एक नई अध्याय होगी.
NEWSANP के लिए अतिक रहमान की रिपोर्ट

