धनबाद(DHANBAD): धनबाद के पास एक छोटे से गांव में जश्न का माहौल है। फेरीवाले दुर्गेश प्रसाद के बेटे आदर्श प्रसाद ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की परीक्षा पास कर ली है। बांस और टिन की छत, मिट्टी की दीवारों वाला उनका घर अब उम्मीदों के उजाले से भरा है। रोज सुबह दुर्गेश बच्चों के कपड़े लेकर फेरी पर निकलते हैं। सीतारामपुर से धनबाद तक की ट्रेनें, सड़कों पर पसीना और शाम को ब्लैक डायमंड ट्रेन से वापसी। घर में न टीवी है, न फ्रिज, लेकिन अब एक नई पहचान है। आदर्श ने तमाम मुश्किल हालातों के बीच 53 प्रतिशत अंकों के साथ परीक्षा पास की। स्कूल के शिक्षकों ने उसकी मेहनत देखकर उसे मुफ्त ट्यूशन दी। आदर्श कहता है, “पिताजी ने फेरी लगाकर मेरी पढ़ाई करवाई। अब मेरी बारी है कि मैं उनका सिर ऊंचा करूं।” मां माया प्रसाद की आंखों में गर्व और खुशी के आंसू हैं “हमारे बेटे ने गरीबी की जंजीरें तोड़ दी हैं।” पड़ोसी भी खुश हैं कहते हैं, यह जीत उस पिता के संघर्ष की जीत है जिसने कभी हार नहीं मानी।आदर्श आज सिर्फ अपने परिवार का नहीं, बल्कि उन तमाम युवाओं का ‘आदर्श’ बन गया है जो हालातों से लड़कर सपनों को सच करने का हौसला रखते हैं।
NEWSANP के लिए धनबाद से ब्यूरो रिपोर्ट

