
बेरमो(BERMO):आज के ज़माने में सड़क हादसों से भी मौत ज्यादा हो रही है. हालांकि समय के साथ सड़कों का भी जाल बिछा है और आधुनिकता का रंग भी दिखलाई पड़ता है. इस सच्चाई से भी नहीं मुकरा जा सकता.
हम जिस सड़क का जिक्र करने जा रहें है उस सड़क पर सफऱ करना ही अपनी जिंदगी पर दांव लगाना है जहां रोज जिंदगी और मौत के बीच एक जंग छिड़ी रहती है. कभी भी अनहोनी का सबब बना रहता है.क्योंकि यहां सफऱ करना ही खतरनाक और खतरों से खेलना है.
यह सड़क फुसरो -जैनामोड़ की है जो इतनी खतरनाक है की कभी भी कोई रफ्तार भरी गाड़ी अगर सावधानी न बरती जाए तो काल के गाल में मुसाफिर को समा सकती है . यह काली और कही मटमेली सड़क खून के छिटों को सोखने के लिए बदनाम रही है. कइयों ने तो बेशकीमती जिंदगी इस सड़क में रफ़्तार के कहर में गांवाई है.
यहां बड़े -बड़े ट्रकों और बसों की रफ़्तार इस कदर डराती है कि मन और दिल सिहर जाता है. डर के साये में सफऱ लोग करते हैं.
सोचिये झारखण्ड अपने वजूद में आने की ढाई दशक की बरसी मनाने की दहलीज पर हैं. लेकिन इस सड़क पर न तो माननियों, न मंत्रियों और न ही मुलाजिमों की नजरें इसके चौड़ीकरण पर गई. जबकि अगर इच्छाशक्ति दिखाई जाती तो ये मुश्किल भी नहीं हैं. लाजमी हैं कि आम आवाम तो सरकार, माननीय और सरकारी अधिकारयों से ही आस लगाएगा. क्योंकि अगर ये चाह गए तब ही होना है.
हां ये जरूर देखा गया है कि अगर कोई दुर्घटना घटती है तो खूब हल्ला मचता है . एकबारगी लगता है कि फुसरो -जैनामोड़ की सड़क के दिन बदलेंगे.अब इसका कायापालट हो जायेगा.
छोटे -बड़े नेताओं के वायदे, इरादे और इसे बनाने को लेकर जुबान की बेबकियां भी कई बार झलकी है. लेकिन अफोसोस ये उसी वक़्त तक ही रहती है . बाद में ये वादे -इरादे हवा -हवाई और कोरे ही साबित हुए है.
इस सड़क पर ओवरलोडेड ट्रक भी आपको चलते हुए दिख जायेंगी. वही बड़े -बड़े वाहन भी बेलगाम रफ़्तार भरते हुए दिखेंगे.इसके साथ ही गड्ढे और बरसात के मौसम में कीचड़ से सनी सड़क कैसे मन किरकिरा कर देती इससे भी वास्ता पड़ेगा. दशकों से लोग इसके फोरलेन बनने की कहानी ही सुनते आए हैं.लेकिन ये कहानियाँ हकीकत नहीं बन पाई है.
फुसरो -जैनमोड़ मार्ग से ही गुजरकर मुसाफिर डुमरी,गिरिडीह, देवघर, संथाल और जीटी रोड पकड़कर दूसरे राज्य बिहार,यूपी और दिल्ली भी जाते है. इस लिहाज से भी इस सड़क की अपनी अहमियत है.
आज भी गहरा और सोचनिए सवाल यहीं है कि इस सड़क का चौड़ीकरण कब होगा? कब इस रोड के फासले बड़े होंगे? कब इस पर नजरें इनायत होगी? और कब तक लोग इसके फासले चौड़े होने का इंतजार करते रहेंगे? कड़वी हकीकत और पिछला तजुर्बा तो यहीं है कि हादसे बोल कर नहीं आते और घर में हर कोई सफऱ के बाद अपनों के आने का इंतजार करता है. खैर अभी भी सबों को इंतजार है. देखिए आखिर ये अरमान कब जमीन पर उतरते हैं.
NEWS ANP के लिए बेरमो से शिवपूजन सिंह की रिपोर्ट

