हज़ारीबाग़(HAZARIBAGH): हजारीबाग के केरेडारी में NTPC माइनिंग के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव को धरना स्थल से पुलिस द्वारा हटाये जाने की घटना, बड़े राजनीतिक और सामाजिक सवालों का कारण बन गई है। NTPC माइनिंग से प्रभावित ग्रामीण लंबे समय से उचित मुआवजा और रोजगार की मांग कर रहे हैं। इन्हीं मांगों के समर्थन में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे। बताया जा रहा है कि धरना स्थल से पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुये पूर्व मंत्री को जबरन उठाकर अलग कर दिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा तेज है कि क्या शांतिपूर्ण धरना कानून व्यवस्था के लिये खतरा था? क्या बातचीत और समाधान का रास्ता नहीं अपनाया जा सकता था? स्थानीय लोगों का कहना है कि एक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध नागरिक का अधिकार है, न कि अपराध। ग्रामीणों का आरोप है कि माइनिंग के नाम पर जमीन ली गई। न पूरा मुआवजा मिला, न रोजगार की ठोस व्यवस्था हुई। इन्हीं जख्मों को लेकर लोग सड़कों पर बैठे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक धरना के दौरान पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और पूर्व विधायक निर्मला देवी को पुलिस ने घसीटते हुये वाहन तक पहुंचाया।
NEWSANP के लिए हजारीबाग से ब्यूरो रिपोर्ट

