पटना (PATNA): गोपाल खेमका हत्याकांड ने पटना की बिजनेस कम्युनिटी को हिला कर रख दिया है, लेकिन इस सनसनीखेज हत्या के पीछे जिस शख्स का नाम सामने आया है, वह और भी खतरनाक कहानी बयां करता है। अशोक साव — एक ऐसा नाम जो न केवल इस हत्या का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, बल्कि उसका अतीत भी आपराधिक साये से भरा रहा है।
अपराध की पटकथा वर्षों पुरानी
अशोक साव कोई आम बिजनेसमैन नहीं, बल्कि एक ऐसा शातिर दिमाग है जो अपने फायदे के लिए अपने ही साझेदारों को रास्ते से हटाने से नहीं चूकता। गोपाल खेमका से पहले भी अशोक का नाम पटना के चर्चित मनोज कमलिया हत्याकांड और टेकरीवाल हत्याकांड में आ चुका है। इन मामलों में उससे पूछताछ तो हुई, लेकिन कानून का शिकंजा उस वक्त उस तक नहीं पहुंच सका। वजह थी उसका सत्ता के एक बड़े चेहरे से करीबी रिश्ता — इतना करीबी कि वह ‘बड़े साहब’ के वित्तीय मामलों का देखरेख करने वाले विश्वासपात्र के संपर्क में था।
आलीशान जिंदगी, मगर ठिकाना नहीं..
अशोक साव के पास लम्बा-चौड़ा कारोबार और भरपूर आमदनी थी, लेकिन इसके बावजूद वह कभी स्थायी रूप से अपने घर में नहीं रहा। उसकी कार्यशैली भी उतनी ही रहस्यमयी और खतरनाक थी। पटना के कई बड़े शूटरों से लेकर जेल में बंद कुख्यात अपराधियों तक से उसके संपर्क थे। उसके लिए साम, दाम, दंड, भेद — हर रास्ता खुला था।
गोपाल खेमका से दुश्मनी की शुरुआत…
गोपाल खेमका और अशोक साव के बीच रिश्ते कभी मधुर नहीं रहे। दोनों के बीच बिजनेस रिलेशन तल्खी में बदल गया जब एक विवादित प्रॉपर्टी को लेकर दोनों में टकराव हुआ। खेमका ने अशोक को बांकीपुर क्लब की रेगुलर मेंबरशिप नहीं लेने दी, जिसके चलते क्लब में ही दोनों के बीच सार्वजनिक रूप से झगड़ा हुआ। यही घटना बाद में जानलेवा दुश्मनी में तब्दील हो गई।
हिमगिरी अपार्टमेंट: अपराध का गढ़
पटना के पॉश इलाके में स्थित हिमगिरी अपार्टमेंट का फ्लैट नंबर 601 — दिखने में एक आलीशान फ्लैट, लेकिन हकीकत में अपराध की प्लानिंग का अड्डा। यहीं से अशोक साव न केवल जमीन के सौदे करता था, बल्कि यही उसका ‘ऑफिस’ भी बन चुका था। पुलिस की छापेमारी में इस फ्लैट से विवादित जमीनों से जुड़े कई एग्रीमेंट डीड, रजिस्ट्री पेपर, और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स मिले हैं, जिनमें पटना के कई बड़े चिकित्सकों और बिजनेसमैन के नाम शामिल हैं।
डॉक्टरों और बिजनेसमैन का काला निवेश..
जांच में खुलासा हुआ कि अशोक साव जानबूझकर विवादित जमीनों में डॉक्टरों और कारोबारी वर्ग का पैसा लगवाता था। जब विवाद बढ़ता, तो वह अपराधियों की मदद से मामला अपने पक्ष में करवाता। इस पूरे काले खेल के दस्तावेज पुलिस को उसके मोबाइल और कम्प्यूटर से मिले हैं, जिसमें लाखों-करोड़ों के लेनदेन का हिसाब दर्ज है।
गोपाल खेमका की हत्या महज एक कारोबारी विवाद नहीं, बल्कि पैसे, पावर और अपराध के गठजोड़ की खौफनाक मिसाल है। अशोक साव जैसे सफेदपोश अपराधी, जो सत्ता के साये में फलते-फूलते हैं, वे कानून और व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। अब जबकि अशोक साव पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है, सवाल ये है कि क्या सिस्टम उस पूरे नेटवर्क को तोड़ पाएगा, जो वर्षों से अपराध की जड़ें सींच रहा है?
NEWS ANP के लिए पटना से ब्यूरो रिपोर्ट

