धनबाद के जांबाज पूर्व SP शहीद रणधीर वर्मा की 34वें शहादत दिवस पर झारखण्ड के गवर्नर ने दी श्रद्धांजलि…

धनबाद के जांबाज पूर्व SP शहीद रणधीर वर्मा की 34वें शहादत दिवस पर झारखण्ड के गवर्नर ने दी श्रद्धांजलि…

धनबाद(DHANBAD): 03 जनवरी 1991 की सुबह आज तक कोयलांचल धनबाद के लोग कभी नहीं भूल सकते हैं। इस दिन की चर्चा होते ही शहर के लोगों को अपने जाबांज एसपी रणधीर प्रसाद वर्मा एवं ISM कर्मी श्यामल चक्रवर्ती के बलिदान की बात याद आ जाती है..

रणधीर वर्मा ने बलिदान देकर खालिस्तानी आंतकवादियों की धनबाद समेत पूरे झारखंड में एंट्री रोकी थी। पहली बार आंतकवादी धनबाद के बैंक में डाका डालने पहुंचे थे। पहले प्रयास में ही वे ढेर हो गए थे। यदि वे सफल हो जाते तो आतंकवादियों का एक सेंटर झारखंड में भी खुल जाता।गोली लगने के बाद भी दोनों वीर डकैतों से करते रहे संघर्षसुबह के करीब दस बज रहे थे। एसपी रणधीर वर्मा एसपी कोठी में थे। तभी उन्हें किसी ने फोन किया कि हीरापुर बिनोद मार्केट स्थित बैंक आफ इंडिया में डकैत घुस गए हैं। सूचना मिलते ही वह पिस्टल और एक अंगरक्षक को लेकर सीधे बैंक पहुंच गए। बैंक प्रथम तल पर था। डकैतों को ललकाराते हुए रणधीर वर्मा सीढ़ी चढ़ गए। तभी ऊपर मौजूद एक आतंकवादी ने उन्हें गोली मार दी। गोली लगते ही वह गिर पड़े।बावजूद उन्होंने एक डकैत को गोली मारकर ढेर कर दिया। उस दौरान आइएसएमकर्मी श्यामल चक्रवर्ती भी बैंक में थे। उन्‍होंने भी डकैतों का विरोध किया। डकैतों ने उन्हें भी गोली मार दी…

इधर उनके अंगरक्षक भी गोली लगने से जख्मी हो गए। तब तक धनबाद थाना की पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। खुद को घिरते देख डकैत भागने लगे। बाद में एक और डकैत को पुलिस ने मार गिराया।शहीद IPS रणधीर प्रसाद वर्मा के 34वें शहादत दिवस पर आयोजित संगीतमय श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल हुए झारखण्ड के गवर्नर ने अपने सम्बोधन में कहा कि धनबाद के युवा शहीद रणधीर वर्मा की शहादत से प्रेरणा जरूर ले. शहीद वर्मा का बलिदान यह बताता है कि हमें अपने कर्तव्य समर्पण के प्रति हमेशा अडिग रहना है. उन्होंने न सिर्फ ख़ालिस्तानी आतंकवादियों से लोहा लिया बल्कि उन्हें मार भी गिराया, अपने प्राणों कि आहुति दी. उन्होंने जो कार्य किया उसे हमेशा याद रखा जायेगा…

उन्होंने बताया कि वे 1989 में जीतकर पहली बार संसद पहुंचे,प्रो. रीता वर्मा के साथ थे. ज़ब वे शहीद वर्मा की शहादत का जिक्र करतीं थीं और आज आकर जो समझा इससे समझ में आता है कि लोग देश के लिए कुर्बानी किस ढंग से करते हैं.इसे हमें समझना चाहिए.झारखण्ड में कुर्बानियों का इतिहास ज़ब देखते हैं तो यह समझ आता है कि बहुत पहले से झारखण्ड के नौजवान देश के लिए कुर्बानी देते आए हैं.जब तक सूरज चांद रहेगा ,IPS रणधीर वर्मा जी का नाम रहेगा…

राज्यपाल संतोष गंगवार ने श्रद्धांजलि सभा को सम्बोधित करने से पहले शहीद वर्मा को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की. शहीद की धर्मपत्नी प्रो. रीता वर्मा, राज्य सभा सांसद दीपक प्रकाश, सांसद ढुल्लु महतो, विधायक राज सिन्हा, झरिया विधायक रागिनी सिंह, धनबाद उपायुक्त माधवी मिश्रा,एसएसपी एचपी जनार्दनन समेत तमाम प्रशासनिक अधिकारी पुलिस अधिकारी एवं गणमान्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की.इस श्रद्धांजलि सभा जिला पुलिस की ओर शहीद को सलामी दी गई.श्रद्धांजलि सभा में कलाकारों ने भजन प्रस्तुति से शहीद क श्रद्धांजलि अर्पित की…

खालिस्तानी आंतकवादियों से लड़ते हुए दिया बलिदान..गौरतलब है कि खालिस्तानी आंतकवादियों से लड़ते-लड़ते बलिदान देने वाले एसपी रणधीर वर्मा को 26 जनवरी 1991 को वीरता के लिए सर्वोच्च पदक अशोक-चक्र से सम्मानित किया गया। वह पहले असैनिक अधिकारी हैं, जिन्हें मरणोपरांत अशोक-चक्र से सम्मानित किया गया था। भारत सरकार ने सन 2004 में उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया था।इधर रणधीर वर्मा के साथ बलिदानी हुए आइएसएम कर्मी श्यामल चक्रवर्ती को आज भी सरकार की ओर से सम्मान नहीं मिला है।श्यामल चक्रवर्ती को नागरिक सम्मान दिलाने के लिए लड़ाई कामरेड एके राय ने शुरू की थी। जिसको लेकर निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने भी कई बार आवाज उठाया है…वामपंथियों की यह लड़ाई आज भी जारी है..

NEWS ANP के लिए विवेक के साथ कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट…

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