देश में पहली बार इच्छामृ’त्यु की प्रक्रिया शुरू, बाप का कलेजा दरका…

देश में पहली बार इच्छामृ’त्यु की प्रक्रिया शुरू, बाप का कलेजा दरका…

दिल्ली(DELHI) : तेरह साल तक दर्द और बेबसी से जूझते रहे हरीश राणा की जिंदगी अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मिलने के बाद शनिवार को उन्हें बेहद गोपनीय तरीके से एम्स (All India Institute of Medical Sciences) में शिफ्ट कर दिया गया। एम्स के पैलिएटिव केयर विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में हरीश के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। हरीश के पिता अशोक राणा ने भावुक स्वर में बताया कि उनका बेटा वर्षों से असहनीय दर्द में जी रहा था। उन्होंने कहा कि हरीश को सांस लेने, खाना देने और अन्य शारीरिक जरूरतों के लिये कई नलियों के सहारे रखा गया था। परिवार ने कहा, “हम नहीं समझ पा रहे कि इस पल को कैसे स्वीकार करें, लेकिन राहत इतनी है कि अब हमारे बेटे को एक सम्मानजनक मृत्यु मिलेगी।” शनिवार सुबह करीब आठ बजे परिवार हरीश को लेकर निजी वाहनों से एम्स के लिये रवाना हुआ। खबर है कि बिना किसी औपचारिक सूचना के तीन गाड़ियों में परिवार और करीबी लोग साथ निकले। CMO अखिलेश मोहन ने मीडिया को बताया कि परिवार ने जाने से पहले प्रशासन को सूचना नहीं दी थी। जब संपर्क करने की कोशिश की गई तो फ्लैट बंद मिला। परिवार के पड़ोसियों के अनुसार राज एंपायर सोसायटी में रहने वाले राणा परिवार ने हरीश को व्हीलचेयर पर लिफ्ट से बेसमेंट तक लाया गया। इसके बाद उन्हें कार में बैठाकर एम्स ले जाया गया। उस समय मौके पर मौजूद परिवार और आसपास मौजूद लोगों के आंखों में आंसू छलक आये। परिवार के साथ पिता अशोक राणा, मां निर्मला देवी, छोटा भाई आशीष, बहन भावना और उनके पति कुछ रिश्तेदार और दोस्तों का छोटा समूह भी एम्स पहुंचा। यहां याद दिला दें कि हरीश राणा ने 2010 में चंडीगढ़ यूनिर्वसिटी में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की थी। 2013 में अंतिम वर्ष के दौरान रक्षाबंधन के दिन बहन से फोन पर बात करते समय वह पीजी की चौथी मंजिल से गिर गये। उन्हें पहले Postgraduate Institute of Medical Education and Research में भर्ती कराया गया और बाद में दिल्ली के अस्पताल में इलाज चला। डॉक्टरों ने बताया कि वह Quadriplegia से ग्रसित हो गये थे, जिससे उनके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गये और वे हमेशा के लिये बिस्तर तक सीमित हो गये। हरीश की पीड़ा को देखते हुये उनके माता-पिता ने इच्छामृत्यु की अनुमति के लिये अदालत का दरवाजा खटखटाया। बीते साल 8 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। करीब आठ महीने की सुनवाई के बाद इसी साल 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी। मीडिया से बात करते हुये बाप अशोक राणा फूट-फूट कर खूब रोने लगे, उनका कलेजा दरक गया।

NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

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