दीपावली आते ही घूमने लगे कुम्हारों की चाक,मौसम की बेरुखी से कुम्हारों में दिखी थोड़ी मायूस…

दीपावली आते ही घूमने लगे कुम्हारों की चाक,मौसम की बेरुखी से कुम्हारों में दिखी थोड़ी मायूस…

प्रधानमंत्री ने भी देशवासियों से स्वदेशी समानों का प्रयोग करने की हैं अपील..शुद्धता की प्रतीक हैं मिट्टी से बने वस्तु।

धनबाद(NIRSA): पूरे भारत में त्यौहारों का सीजन चल रहा है साथ ही बाजार में चारों ओर रौनक दिख रही है इस त्योहारी सीजन की शुरुआत नवरात्रि के साथ हुई है नवरात्र, दशहरा, दीवाली और छठ पूजा के साथ ये सिलसिला लगभग दो महीने तक जारी रहता है नवरात्र और दशहरा बीत जाने के बाद लोग दीपावली की तैयारी में जुट जाते हैं घरों की साफ सफाई रंग रोगन के साथ साथ घरों में मिट्टी से बने दिये जलाने की मान्यता आदि काल से चली आ रही हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्रभु श्रीराम 14 वर्षों के वनवास से वापसी के बाद अयोध्या लौटे थे।अयोध्या लौटने के बाद अयोध्या वासियों के की ओर से मिट्टी के दिये जलाकर भगवान राम का राज्याभिषेक किया था जिसके कारण राज्य में एक खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी और नगर वासियों ने पूरे राज्य में मिट्टी का दीप जलाकर दिवाली मनाई थी जिसके बाद से ही सुख-समृद्धि के लिए पूरे भारत वर्ष में दीपावली मनाई जाती है।
मिट्टी के दिये जो किसी भी पूजा-पाठ के लिए अहम माना जाता है नवरात्रि, दीवाली और छठ में इस दिए की मांग दोगुनी हो जाती है,दीवाली तो दियों का ही त्योहार है नवरात्रि से लेकर दीवाली तक पूरा देश दीयों की रोशनी में जगमगाता है ऐसे में मिट्टी के दिये की मांग में भी तेजी से बढ़ जाती है लेकिन मौसम की मार ने कुम्हारों के उम्मीदों पर पानी फेर रहा हैं लगातार वारिश की वजह से उम्मीद के अनुसार दिये नहीं बना पा रहे हैं जितना बाजारों में मांगे हैं उस अनुपात में मिट्टी के दिये नहीं बन पा रहे हैं।

जब कुम्हारों से बात की तो उन्होंने बताया कि इस वर्ष मौसम की बेरुखी के कारण बाजारों की मांग की अनुसार दिये पूरा कर पाना मुश्किल हैं।

परिश्रम के अनुपात नहीं मिलता हैं मेहनताना।

निरसा एव चिरकुंडा के कुम्हारों का कहना हैं कि पूर्वजों की यह व्यवसाय की आज भी जीवित रखे हुए हैं पूरा परिवार कड़ी मेहनत और लगन से मिट्टी से बने दिये, मिट्टी के खिलौने,पूजा की कलश और गुल्लक बनाते हैं और बाजारों में थोक एव खुदरा बिक्री करते हैं जिससे कुछ आमदनी हो जाती हैं लेकिन मौसम की मार के कारण उतना मिट्टी का सामान नहीं बन पाया जिसके कारण दीपावली में मिट्टी से बने वस्तुओं में तेजी की अनुमान हैं।

बाजारों में चाइना और एलईडी लाइटों की भरमार

दीपावली आते हैं बाजारों में तरह तरह के रंग बिरंगी चाइना और एलईडी लाइटों देखने को मिलता हैं लोग इसे भी खूब पसंद करते हैं लेकिन सही मायने में मिट्टी से बने दिये ही शुद्धता के प्रतीक माना गया हैं चाईनीज लाईट आने से भी कुम्हारों की व्यवसाय में थोड़ी नरमी आई हैं।

दर्शकों से अपील इस दीपावली में अपने घरों में मिट्टी से बने दिये का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें प्रधानमंत्री ने भी लोकल फॉर भोकल का नारा दिया है और पिछले दिनों ही उन्होंने मन की बात कार्यक्रम के तहत पूरे भारतवासियों से स्वदेशी समानों प्रयोग करने की अपील किए हैं जिससे हमारे देश का जीडीपी भी ग्रोथ करेगा और जिससे हमारे देश में हस्तशिल्प को भी बढ़ावा मिलेगा,तो आईए हम सब संकल्प ले की स्वदेशी ही अपनाए और अपने देश को शक्तिशाली राष्ट्र बनाए और इस दीपावली में मिट्टी से बने दिये जाकर ही खुशियोभरा दीपावली मनाए।

NEWSANP के लिए निरसा से संतोष की रिपोर्ट

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