डॉ. दुर्गेश झा को फिर मिला बड़ा सम्मान — चिकित्सा सेवा में “कर्म ही पूजा” का मिसाल बने युवा चिकित्सा पदाधिकारी…

डॉ. दुर्गेश झा को फिर मिला बड़ा सम्मान — चिकित्सा सेवा में “कर्म ही पूजा” का मिसाल बने युवा चिकित्सा पदाधिकारी…

वेद-पुराणों के आदर्शों से प्रेरित, आधुनिक चिकित्सा की भूमि पर जामताड़ा की पहचान निखरी रही है

जामताड़ा(JAMTARA): कहते हैं — “जहाँ कर्म प्रधान होता है, वहाँ परिणाम स्वयं नतमस्तक हो जाता है।” यही कहावत चरितार्थ कर दिखाई है जामताड़ा सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दुर्गेश झा ने।
राज्य स्तर पर जारी स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धि सूची में महिला नसबंदी (1447 केस) और पुरुष नसबंदी (32 केस) जैसी उल्लेखनीय सेवाओं के साथ उन्होंने जामताड़ा जिले का नाम झारखंड के शीर्ष प्रदर्शन जिलों में दर्ज कराया है।

वेदों में कहा गया है — “श्रद्धया देयम्, अश्रद्धया अदेयम्” — अर्थात् सेवा तभी सफल होती है जब वह समर्पण से की जाए।
डॉ. दुर्गेश झा ने इसी भाव को आत्मसात करते हुए चिकित्सा सेवा को साधना बना दिया। उनकी कार्यशैली ऐसी रही कि मरीज केवल इलाज नहीं पाते, बल्कि भरोसा भी लेकर लौटते हैं।

झारखंड की चिकित्सा व्यवस्था में जामताड़ा की दस्तक

स्वास्थ्य विभाग की हालिया राज्यस्तरीय समीक्षा में जहाँ बोकारो, रांची और पूर्वी सिंहभूम जैसे जिले अपने उपलब्धियों के लिए चर्चित रहे, वहीं जामताड़ा का सदर अस्पताल अपनी निष्ठा, अनुशासन और मानवता के कारण विशेष पहचान बना गया।
यहाँ पीपी आईयू सीडी के 2228, अंतरा सेवाओं के 364, तथा ट्यूबेक्टोमी के 496 मामलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया — जो छोटे जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

डॉ. झा की सेवा साधना: कर्मयोग का जीवंत उदाहरण”

जैसे भगवान धन्वंतरि ने अमृत कलश लेकर जग को रोगमुक्त करने का संकल्प लिया था, वैसे ही जामताड़ा के डॉ. झा ने अपनी कर्मभूमि को चिकित्सा- साधना का क्षेत्र बना लिया।
उनकी कार्य कुशलता केवल आँकड़ों की नहीं, बल्कि संवेदना की भाषा बोलती है। वे मानते हैं कि –

“सेवा केवल एक ड्यूटी नहीं, यह समाज को जीवन लौटाने की तपस्या है।”

उनके नेतृत्व में जामताड़ा जिले में परिवार नियोजन, महिला स्वास्थ्य और जनजागरूकता अभियानों की गति तीव्र हुई है।
उनके प्रयासों से सहरिया, कुट्टाबांध, नारायणपुर जैसे ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा पहुंच की नई परिभाषा बनी है।

वेदांत और आधुनिकता का संगम

जामताड़ा के चिकित्सा क्षेत्र में आज जो चमक दिख रही है, उसकी जड़ें भारतीय वेदांत में हैं — “आरोग्यम् मूलं धर्मस्य” — अर्थात् स्वास्थ्य ही धर्म का आधार है।
डॉ. दुर्गेश झा ने इस सूत्र को जीवन में उतारते हुए आधुनिक चिकित्सा को लोकधर्म से जोड़ा।
उनकी सोच है —

“जब तक समाज स्वस्थ नहीं, तब तक कोई भी योजना सफल नहीं।”

झारखंड स्वास्थ्य निदेशालय ने किया सम्मानित

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने हाल में जारी सूची में डॉ. दुर्गेश झा को “श्रेष्ठ सेवा प्रदाता” श्रेणी में शामिल किया है।
उनका नाम डॉ. अरविंद कुमार दास (दुमका), डॉ. आर.के. सिंह (रांची) और अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ लिया गया — यह स्वयं में जामताड़ा के लिए गौरव की बात है।

जामताड़ा: छोटा जिला, बड़ी उपलब्धिकारियों

सदर अस्पताल जामताड़ा ने न केवल परिवार नियोजन कार्यक्रमों में शानदार प्रदर्शन किया है, बल्कि “आयुष्मान आरोग्य मंदिर” योजना के तहत भी राज्य में शीर्ष पाँच में स्थान प्राप्त किया है।
यह उपलब्धि जिले के चिकित्सा कर्मियों, एनएम, जीएनएम और सहिया टीमों — विशेषकर ललिता मंडल (68% PPIUCD सम्मिलन) और उषा टुडू (अंतरा सेवा – 1436) जैसी कार्यकर्ताओं की मेहनत का प्रतिफल है।

समापन: जामताड़ा की सेवा गाथा

आज जब राज्य भर में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार की चर्चा है, तब जामताड़ा जैसे छोटे जिले का नाम “उदाहरण” बन कर उभरा है।
यह वही जामताड़ा है जो कभी सीमित संसाधनों के लिए जाना जाता था, और अब “संकल्प से सिद्धि” की मिसाल बन चुका है।

वेदों में कहा गया है —

“नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः” — अर्थात् जो दृढ़ संकल्पी है, वही सफलता को पाता है।
डॉ. दुर्गेश झा ने इस मंत्र को अपने कर्म से सिद्ध कर दिखाया है।
उनकी सेवा यात्रा जामताड़ा के लिए केवल गर्व नहीं, बल्कि भविष्य की चिकित्सा दिशा की प्रेरणा भी है।

NEWSANP के लिए आर पी सिंह की रिपोर्ट

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