झारखंड(JHARKHAND): झारखंड में नगर निकाय चुनाव का रास्ता अब लगभग साफ हो गया। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में नगर पालिका निर्वाचन में पिछड़े वर्ग के आरक्षण निर्धारण के लिए नियमावली में संशोधन का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने चुनाव नियमावली में परिवर्तन करते हुए पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट भी स्वीकार कर ली है। इस तरह अब झारखंड में नगर निगम चुनावों का रास्ता भी साफ हो गया है। हालांकि, चुनावों में देरी को लेकर अभी कोर्ट में सुनवाई होनी है।
कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि ट्रिपल टेस्ट के आधार पर 50 फीसदी की अधिसीमा के अंतर्गत पिछड़ा वर्ग को आरक्षण मिलेगा। इससे एसटी, एससी वर्ग का आरक्षण प्रभावित नहीं होगा। पूर्व में सिर्फ अनुसूचित जाति व जनजाति को ही आरक्षण मिलता था, पर अब हर निकाय में पिछड़ा आरक्षण की सीमा अलग-अलग होगी। ओबीसी को बीसी -1 और बीसी- 2 में विभाजित कर उनकी जनसंख्या के समानुपात में आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है।
राज्य में नगर निगम और नगर निकाय चुनाव में देरी को लेकर दायर अवमानना याचिका पर मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस आनंदा सेन की अदालत ने राज्य सरकार को निकाय चुनाव कराने के संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग को अनुशंसा भेजने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। मामले में अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी।
कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह अगली सुनवाई तक राज्य निर्वाचन आयोग को यह बताएं कि कब तक राज्य में नगर निगम व नगर निकायों का चुनाव कराएगी। सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह सचिव वंदना दादेल, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव ज्ञानेंद्र कुमार मौजूद थे। इन सभी को अगली सुनवाई पर भी कोर्ट में हाजिर रहने को कहा है। अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने चुनाव कराने के लिए तीन माह का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने नहीं माना।
NEWSANP के लिए झारखंड से ब्यूरो रिपोर्ट

