जामताड़ा नगर पंचायत चुनाव 2026: निर्णायक मोड़ पर तरुण कुमार गुप्ता…

जामताड़ा नगर पंचायत चुनाव 2026: निर्णायक मोड़ पर तरुण कुमार गुप्ता…

जामताड़ा(JAMTADA): जामताड़ा में होने वाला नगर पंचायत चुनाव 2026 अब केवल स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है। यह चुनाव व्यक्तिगत संघर्ष, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और वर्षों की कड़वाहट का केंद्र बन चुका है।

जेल से चुनावी रण तक: तरुण कुमार गुप्ता की कहानी
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में यह आरोप बार-बार सामने आता है कि
तरुण कुमार गुप्ता को कथित राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौर में प्रभावशाली नेता वीरेंद्र मंडल के प्रभाव से जेल भेजा गया।
समर्थकों का दावा है कि लंबी जेल अवधि ने उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से तोड़ा, लेकिन उसी दौर ने उनके भीतर राजनीतिक प्रतिशोध और वापसी की इच्छा को भी मजबूत किया।
अब 2026 का चुनाव उनके लिए सिर्फ राजनीतिक चुनौती नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा की पुनर्स्थापना की लड़ाई बन गया है।

चुनावी इतिहास: संघर्ष लंबा, जीत अब तक दूर
तरुण कुमार गुप्ता का राजनीतिक सफर कई बड़े मुकाबलों से होकर गुजरा है—
भाजपा टिकट पर सारठ विधानसभा से चुनावी शुरुआत
शिबू सोरेन जैसे दिग्गज नेता के खिलाफ जामताड़ा विधानसभा से मुकाबला
करमाटांड़ से जिला परिषद चुनाव में भागीदारी
लगातार प्रयासों के बावजूद उन्हें अब तक जीत नहीं मिली। यही वजह है कि स्थानीय राजनीति में उन्हें संघर्षशील लेकिन दुर्भाग्यशाली नेता के रूप में देखा जाता है।

पत्नी के सहारे राजनीतिक पुनरागमन
2026 में उन्होंने अपनी पत्नी आशा गुप्ता को मैदान में उतारा है।
यह कदम दो संकेत देता है—
राजनीतिक पुनरागमन की कोशिश
पुराने अपमान और कथित अन्याय का राजनीतिक जवाब
आशा गुप्ता सीधे तौर पर वर्तमान अध्यक्ष वीरेंद्र मंडल को चुनौती दे रही हैं।

तीसरा कोण: चमेली देवी की एंट्री
इस चुनाव का तीसरा अहम चेहरा हैं चमेली देवी, जो पूर्व विधायक विष्णु प्रसाद भैया की पत्नी हैं और झामुमो समर्थित उम्मीदवार मानी जा रही हैं।
राजनीतिक समीकरण इस प्रकार देखे जा रहे हैं—
संगठनात्मक मजबूती में वीरेंद्र मंडल आगे
व्यक्तिगत संघर्ष और जमीनी नेटवर्क में तरुण गुट सक्रिय
सहानुभूति और पार्टी समर्थन में चमेली देवी निर्णायक साबित हो सकती हैं
रणनीतिक दुविधा
सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या तरुण कुमार गुप्ता सीधी टक्कर में वीरेंद्र मंडल को हराकर व्यक्तिगत बदले की कहानी पूरी करेंगे?
या यदि समीकरण प्रतिकूल हुए, तो क्या “दो की लड़ाई में तीसरे को फायदा” की रणनीति अपनाई जाएगी?
राजनीतिक इतिहास में उनके पुराने समीकरण और बाद के मतभेद इस चुनाव को और जटिल बना रहे हैं।

NEWSANP के लिए आर पी सिंह की रिपोर्ट

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