जामताड़ा(JAMTADA): जामताड़ा जिला परिषद की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जिला परिषद अध्यक्ष राधा रानी सोरेन के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में उन्हें अध्यक्ष पद से हटना पड़ा। कुल 19 सदस्यों वाली जिला परिषद में से 18 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि एक सदस्य ने कोरा मतपत्र डाला। तीन-चौथाई से अधिक बहुमत मिलने के कारण अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया और राधा रानी सोरेन को अध्यक्ष पद से विमुक्त कर दिया गया।
यह अविश्वास प्रस्ताव जिला परिषद सदस्य दीपिका बेसरा द्वारा प्रस्तुत किया गया था। मतदान प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में संपन्न हुई, जिसमें जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की खास निगाहें टिकी रहीं।
आरोप : बैठकें नहीं बुलाने और समन्वय की कमी
अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करने वाले सदस्यों का आरोप था कि राधा रानी सोरेन ने लंबे समय तक जिला परिषद की नियमित बैठकें नहीं बुलाईं और परिषद सदस्यों के साथ समन्वय स्थापित करने में विफल रहीं। सदस्यों का कहना था कि इससे न केवल परिषद की कार्यप्रणाली प्रभावित हुई, बल्कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी बाधा उत्पन्न हुई।
मतदान में मंत्री और सांसद की मौजूदगी
अविश्वास प्रस्ताव पर हुई मतदान प्रक्रिया में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और सांसद नलिन सोरेन ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया। दोनों जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी को जिला परिषद की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राधा रानी सोरेन का पलटवार
अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद राधा रानी सोरेन ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उपायुक्त के स्तर पर षड्यंत्र रचकर वोटिंग करवाई गई, जिससे उन्हें पद से हटाया गया। राधा रानी सोरेन ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया।
प्रशासन का जवाब : आरोप निराधार
राधा रानी सोरेन के आरोपों पर उपायुक्त रवि आनंद ने स्पष्ट शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव की पूरी प्रक्रिया नियमसम्मत, पारदर्शी और विधि अनुसार संपन्न हुई है। उपायुक्त ने बताया कि मतदान प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी कराई गई, जिससे किसी भी प्रकार के अनियमितता या दबाव के आरोप निराधार साबित होते हैं।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताया गया
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और सांसद नलिन सोरेन ने भी इस घटनाक्रम को लोकतांत्रिक प्रक्रिया करार दिया। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव संविधान और कानून द्वारा प्रदत्त अधिकार है, और बहुमत के आधार पर लिया गया निर्णय लोकतंत्र की मूल भावना को दर्शाता है।
राजनीतिक संदेश
राधा रानी सोरेन के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का पारित होना जामताड़ा जिला परिषद की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि जिला परिषद में नेतृत्व तभी टिकाऊ रह सकता है, जब सदस्यों के साथ समन्वय, नियमित बैठकें और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि जिला परिषद को नया नेतृत्व कब और किस दिशा में मिलेगा।
NEWSANP के लिए आर पी सिंह की रिपोर्ट

