धनबाद(DHANBAD): झारखंड की सियासत में नए मुख्यमंत्री आवास के निर्माण को लेकर उबाल आ गया है। डुमरी विधायक जयराम महतो ने सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना करते हुए इसे जनता के पसीने की कमाई का खुला दुरुपयोग बताया है। विधायक ने कड़े शब्दों में कहा कि जब राज्य में पहले से ही मुख्यमंत्री आवास बना हुआ है, तो फिर 67 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि से नए महल की जरूरत क्यों आन पड़ी। उन्होंने अंदेशा जताया कि झारखंड की कार्यशैली को देखते हुए भवन के पूर्ण होने तक यह लागत आसानी से 100 करोड़ के पार पहुंच जाएगी।
जयराम महतो ने आंकड़ों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि पिछले 25 वर्षों में वर्तमान मुख्यमंत्री आवास के रखरखाव और मरम्मती के नाम पर ही लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने सरकार को घेरते हुए पूछा कि आखिर हर साल दो से चार करोड़ रुपये की ऐसी कौन सी मरम्मती होती है जिसके बाद भी नए आवास की आवश्यकता पड़ गई। विधायक ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए दावा किया कि आवास की मरम्मती के नाम पर अभियंता 40 से 50 प्रतिशत तक कमीशन की वसूली करते हैं और वे चुनौती देते हैं कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच करवा कर देख ले।
राज्य की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए विधायक ने कहा कि एक तरफ झारखंड की ग्रामीण आबादी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रही है और छात्रवृत्ति न मिलने के कारण गरीब छात्र जमीन और गहने गिरवी रखकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को करोड़ों का बंगला चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से भावुक अपील करते हुए कहा कि इस फिजूलखर्ची को रोककर इस राशि का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में किया जाना चाहिए।
महतो ने सुझाव दिया कि इस 100 करोड़ की राशि से मुख्यमंत्री के अपने विधानसभा क्षेत्र बरहेट में नेतरहाट की तर्ज पर एक भव्य विद्यालय का निर्माण किया जाना चाहिए, जिसमें केवल संथाल परगना के बच्चों का नामांकन हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड जैसे गरीब राज्य में, जहां लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर कर रहे हैं, वहां विलासिता पर करोड़ों का खर्च करना किसी भी सूरत में तर्कसंगत नहीं है।
NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

