मट्टटांड झिलुवा में चार दिवसीय शिव आराधना का अनूठा आयोजन
जामताड़ा(JAMTADA):मट्टटांड झिलुवा स्थित ऐतिहासिक राजाबांध शिव मंदिर परिसर में चड़क पूजा महोत्सव चल रहा है। इस वर्ष भी यह चार दिनों तक चलेगा । जिसमें पहले दिन ‘पानी पाट’ अनुष्ठान श्रद्धा, संयम और भक्ति का अद्वितीय उदाहरण बन गया। इस पारंपरिक आयोजन में सैंकड़ों की संख्या में व्रती श्रद्धालु ‘भोग्ता’ के रूप में भाग लिया। जो उपवास रखकर जल के सहारे कठिन साधना में लीन रहते हैं। यह अनुष्ठान न केवल शिवभक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाता है। बल्कि क्षेत्रीय सांस्कृतिक अस्मिता को भी गहराई से प्रस्तुत करता है।
शिव अराधना में दिखी पुरातन परंपराओं की जीवंत झलक
चार दिवसीय इस आयोजन की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना से हुआ । जिसके अंतर्गत जल, बेलपत्र, धतूरा और भस्म से शिवलिंग का अभिषेक किया गया । ‘पानी पाट’ अनुष्ठान के दौरान भक्त पूरे समय उपवास रहते हुए केवल जल ग्रहण करते हैं।जो दिन-रात मंदिर परिसर में रहकर शिव नाम का संकीर्तन करते हैं। महिलाएं पारंपरिक गीतों में व्यस्त रहती हैं। वहीं पुरुष भक्त ढोल-मांदर की थाप पर शिव के जयकारे के साथ नृत्य करते हैं। यह माहौल पूरे क्षेत्र को भक्ति रस में सराबोर कर देता है।
वीरेंद्र मंडल की मौजूदगी से आयोजन में लगा चार चांद
शनिवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और जामताड़ा में पार्टी का बड़ा चेहरा माने जाने वाले वीरेंद्र मंडल की मौजूदगी से आयोजन में विशेष उत्साह देखा गया। मंडल सनातन चेतना जागरुकता अभियान के तहत लगातार धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़े रहे हैं। इस बार भी उन्होंने झिलुवा पहुंचकर पानी पाट पूजनोत्सव में सहभागिता दर्ज की। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “चड़क पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना का स्तंभ है। यह हमें अपने आलौकिक जड़ों से जुड़ने का माध्यम है । आने वाली पीढ़ियों के लिए इसका संरक्षण करना जरूरी है।”
सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता का मंच बना चड़क पूजा
पूरे मट्टटांड क्षेत्र में चड़क पूजा को सामाजिक एकता का उत्सव भी माना जाता है। विभिन्न जाति, वर्ग और पंथों के लोग एक साथ मिलकर इस आयोजन को सफल बनाते हैं। वीरेंद्र मंडल ने यह भी उल्लेख किया कि इस आयोजन के समानांतर “विश्वा मेला” का भी आयोजन होता है। जो स्थानीय व्यापार, संस्कृति और कला के प्रचार का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और समिति की कुशल व्यवस्था
पूरे क्षेत्र से हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में उपस्थित हुए। आयोजन समिति द्वारा की गई व्यवस्थाएं और स्थानीय लोगों का सहयोग इस आयोजन को सफल बनाने में निर्णायक साबित हुए। भक्तों की सुरक्षा, चिकित्सा व्यवस्था और प्रसाद वितरण की पूरी योजना व्यवस्थित ढंग से क्रियान्वित की गई।
निष्कर्ष
चड़क पूजा और पानी पाट अनुष्ठान, सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक आत्मचिंतन और सामाजिक सौहार्द का जीवंत प्रतीक बन चुका है। भाजपा नेता वीरेंद्र मंडल की भागीदारी ने न केवल आयोजन को राजनीतिक समर्थन दिया बल्कि सनातन संस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी उजागर किया। मट्टटांड झिलुवा की भूमि एक बार फिर भक्ति, समर्पण और सामाजिक समरसता का उदाहरण बन कर स्थापित हुआ है। जिसकी महत्त्ता क्षेत्र में हर उम्र, हर मजहब और हर जाति विषेश की जुबान पर चढ़ कर बोल रहा है।
NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

