बिहार(BIHAR): बिहार में भ्रष्टाचार की फाइलें एक बार फिर खुल चुकी हैं इस बार नाम है कुमार कुंदन, जो वर्तमान में दरभंगा में राज्य खाद्य निगम के जिला प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। लेकिन गोपालगंज में पदस्थापना के दौरान इन पर लगे आरोपों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि अब मामला आर्थिक अपराध इकाई तक पहुंच चुका है।
गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि कुंदन ने सहकारिता प्रसार पदाधिकारी सह जिला प्रबंधक रहते हुए अकूत संपत्ति अर्जित की, जिसका पूरा विवरण उन्होंने वार्षिक संपत्ति विवरणी में नहीं दिया। डीएम ने न सिर्फ राज्य सरकार को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की, बल्कि 25 जून को आर्थिक अपराध इकाई के एसपी को भी जांच सौंप दी।
जांच रिपोर्ट के चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 83.52 लाख की भूमि संपत्ति और 19 लाख रुपये बैंक बैलेंस छुपाए गए।एक स्टेट बैंक में 11 खाते, जिनमें लेन-देन की जानकारी संदिग्ध।
स्थानांतरण के बावजूद मातहत कर्मचारी से 2672 बार मोबाइल बातचीत, जिससे संगठित अवैध उगाही की बू आ रही है।जांच के दौरान पत्नी प्रीति चौरसिया का पैन और आधार नंबर देने से इनकार।
जांच अधिकारियों को आईबी का पूर्व अधिकारी बताकर धमकाना, जो अपने आप में एक गंभीर आपराधिक मानसिकता को दर्शाता है।
कुंदन ने दावा किया कि जमीन हाजीपुर व बिहटा में है, पटना का फ्लैट लोन पर है और कार भी फाइनेंस पर ली गई है। परंतु जब दस्तावेजों की बात आई तो उन्होंने टाल-मटोल की नीति अपनाई।
मामला केवल संपत्ति का नहीं, बल्कि गरीबों को मिलने वाले खाद्यान्न के वितरण में गड़बड़ी, मातहतों की मिलीभगत और पद का दुरुपयोग कर अवैध लाभ उठाने का है।
अब देखना है कि ईओयू की जांच के बाद इस ‘सफेदपोश अफसर’ पर कब और कैसी कार्रवाई होती है, क्योंकि बिहार में कुर्सी से भरोसे तक सब कुछ दांव पर है।
NEWSANP के लिए बिहार से ब्यूरो रिपोर्ट

