रांची(RANCHI): विधानसभा के सन्नाटे को चीरते हुये जब प्रदीप यादव ने किसानों की आवाज उठाई, तो सत्ता के गलियारों में एक बार फिर भूख, संघर्ष और अन्याय की गूंज सुनाई दी। वे पहुंचे CM हेमंत सोरेन के द्वार—चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं और दिल में गोड्डा के खेतों से उठती वो सिसकी, जो अडानी पावर प्लांट की दीवारों से टकराकर लौट आती है। “भाई साहब, वही काम, वही मेहनत… फिर क्यों हमारे लोग 15 हजार में झुकें, और बाहर वालों को लाखों की तनख्वाह?” प्रदीप यादव की यह बात कोई राजनीतिक संवाद नहीं थी, यह उस मां की चीख थी जिसने बेटे को खेत से फैक्ट्री भेजा था, पर आज वो बेटा भीख मांगते मजदूरी कर रहा है।
CM हेमंत सोरेन ने सारी बातें गंभीरता से सुनी। और वादा किया, “न्याय होगा, जल्दी होगा।” पर किसान तो अब वादों से नहीं बहलते। 14 अप्रैल को आंदोलन की चेतावनी है, और इस बार नारे सिर्फ सत्ता के खिलाफ नहीं होंगे, ये आवाजें उस सिस्टम को भी झकझोरेंगी जो अपने ही बच्चों से सौतेला व्यवहार करती है। प्रदीप यादव ने कहा कि न अस्पताल बना, न स्कूल, न नौकरी, कभी विकास का सपना दिखाकर उजाड़े गये गांव आज बियाबान हो गये हैं। और जिस गोड्डा की मिट्टी में हल चलता था, वहां अब मशीनें दौड़ती हैं, पर उनके पीछे जो छूट गया है, वो हैं भूखे पेट और टूटी उम्मीदें।
NEWSANP के लिए रांची से ब्यूरो रिपोर्ट

