रांची (RANCHI): झारखंड के संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह ने छत्तीसगढ़ में झारखंड शराब घोटाले के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी है. बिलासपुर हाइकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जवाब देने के लिए समय मांगा गया. न्यायालय ने इसे स्वीकार कर लिया. साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार को एक सप्ताह के अंदर लिखित जवाब देने का निर्देश दिया और एक सप्ताह बाद मामले को सुनवाई के लिए पेश करने का आदेश दिया.
झारखंड के संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह द्वारा दायर याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश विभू दत्त गुरु की पीठ में हुई. इस दौरान गजेंद्र सिंह की ओर से यह दलील दी गयी कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 ए में निहित प्रावधानों को पूरा किये बिना पुलिस उनके खिलाफ जांच नहीं कर सकती है. संशोधित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की इस धारा में सरकारी अधिकारियों को संरक्षण दिया गया है. इसके तहत पुलिस सरकार की अनुमति के बाद ही आरोपी अधिकारी के खिलाफ जांच कर सकती है. छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से सुनवाई के दौरान यह कहा गया कि किसी के भी खिलाफ कहीं भी प्राथमिकी दर्ज हो सकती है. इसलिए छत्तीसगढ़ में दर्ज प्राथमिकी में छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड के अधिकारियों को अभियुक्त बनाया जाना नियम संगत है.
छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से गजेंद्र सिंह की याचिका में उठाये गये बिंदुओं पर जवाब देने के लिए समय की मांग की गयी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया. अरगोड़ा निवासी विकास सिंह की शिकायत की जांच के बाद छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ने प्राथमिकी दर्ज की थी. इसमें आठ अफसरों को नामजद बनाया गया था. इसमें से छह छत्तीसगढ़ और झारखंड के तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे व संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह को नामजद अभियुक्त बनाया है.
NEWSANP के लिए रांची से ब्यूरो रिपोर्ट

