धनबाद (DHANBAD): राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के महामंत्री ए के झा, कार्यकारी अध्यक्ष ब्रजेंद्र प्रसाद सिंह, वरीय अधिवक्ता, मन्नान मल्लिक, पूर्व मंत्री एवं कार्यकारी अध्यक्ष अनुपमा सिंह ने एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा है कि इंडियन नेशनल माइंस वर्कर फेडरेशन (इंटक) ने कोयला मजदूरों की आवाज को बराबर मजबूती से उठाने का काम किया है। मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष किया है। राष्ट्रहित और मजदूर हित में बुलंदी के साथ काम करने का काम किया है। मजदूर हित हमारी प्राथमिकता रही है।
राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन (इंटक) के महामंत्री एके झा ने कहा कि दशहरा के पवित्र त्यौहार के पूर्व कोल इंडिया प्रबंधन को राजनीतिक साजिश का शिकार बनाकर किसी श्रमिक संगठन विशेष ने मजदूरों के सालाना बोनस भुगतान को रोकने का असफल प्रयास किया है।
फेडरेशन के दिवंगत नेता राजेंद्र बाबू ने सदैव मजदूरों के सवाल पर संघर्ष करने का एक लंबा इतिहास बनाया है। जब भी किसी शासन काल में मजदूरों के साथ कोल इंडिया लिमिटेड प्रबंधन ने नाइंसाफी करने का प्रयास किया, दिवंगत नेता राजेंद्र बाबू ने आगे बढ़कर उसका प्रतिकार किया और मजदूरों को उनका हक दिलाने में कामयाबी हासिल की, चाहे सत्ता में कोई भी राजनीतिक दल हो।
झा ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में वर्ष 2010 में सालाना बोनस भुगतान पर प्रबंधन ने नाइंसाफी करने का प्रयास किया, तो राजेंद्र बाबू ने सभी श्रमिक संगठनों के साथ एक दिन का हड़ताल की नोटिस तत्काल प्रबंधन को सुपुर्द किया,साथ ही झारखंड विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा देने की पेशकश भी की। परिणाम स्वरूप तत्कालिन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह और कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा UPA चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने तुरंत पहल करते हुए दिवंगत नेता राजेंद्र बाबू से बात किया। कोयला मजदूरों को कोल इंडिया प्रबंधन द्वारा घोषित बोनस की राशि में ₹5500 की बढ़ोतरी का भुगतान प्रधानमंत्री के आदेश पर कराया,इतना ही नहीं तमाम केंद्रीय श्रमिक संगठनों के नेताओं को सरकारी विमान से दिल्ली बुलाकर कोल इंडिया लिमिटेड प्रबंधन के साथ लिखित समझौता भी कराया।
झा ने कहा कि NCWA-XI में उच्चतम न्यायालय ने सारे पिटीशन को खारिज करते हुए फेडरेशन के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार जय मंगल (अनूप सिंह), विधायक के प्रतिनिधित्व पर मोहर लगाई। परिणाम स्वरूप मात्र दो बैठक में ही सभी श्रमिक संगठनों की आपसी कोआर्डिनेशन से कोल वेज समझौता संपन्न हुआ। मानकीकरण कमेटी वेज बोर्ड का ही हिस्सा है। उससे फेडरेशन को फिर बाहर निकलना, प्रबंधन की मजदूर और इंटक विरोधी सोच और नियत को दर्शाता है, चाहे इसके पीछे किसी केंद्रीय श्रमिक संगठन का राजनीतिक दबाव हो।
इन नेताओं ने सीटू के डी डी रामनंदन, एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेंद्र कुमार जी, पूर्व सांसद के वक्तव्य का पूर्ण समर्थन किया है ।
इन नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार की नियत, नीति और सोच पूंजीवाद परस्त रहा है, मजदूर विरोधी रहा है पिछले 11 वर्षों में सत्ता में रहते हुए भाजपा सरकार ने मजदूर, किसान और नौजवान के खिलाफ नीतियां बनाई है और उनकी आवाज को दबाने का काम किया है। हम सभी कोयला मजदूर एक हैं। सम्मानजनक बोनस पूजा में दिलाना, उसके लिए संघर्ष करना, हमारे लिए राष्ट्रीय धर्म है। सभी श्रमिक संगठनों को एक होकर शांतिपूर्ण आंदोलन से प्रबंधन को मजबूर करना है कि वो सम्मानजनक सालाना बोनस की राशि के मद में तुरंत भुगतान करें।
NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

