झारखंड(JHARKHAND):झारखंड में मुख्य सूचना आयुक्त, लोकायुक्त और अन्य आयोगों में रिक्त पदों पर नियुक्ति कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट बेहद सख्त नजर आया। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने झारखंड सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर नियुक्ति में देरी क्यों हो रही है? अदालत ने झारखंड सरकार से साफ कहा कि कहनी मत सुनाइए साफ बताइए कि नियुक्ति कब तक कर रहे हैं।
क्या बोली सरकार?
सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ को बताया कि मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति की सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सिर्फ एक बैठक करनी बाकी है। लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए भी फाइल मुख्य न्यायाधीश के पास सहमति (कंसेंट) के लिए भेजी जानी है। कंसेंट मिलते ही नियुक्ति कर दी जाएगी।
कहानी मत सुनाइए
इस पर चीफ जस्टिस ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें कहानी मत सुनाइए यह साफ-साफ बताइये कि नियुक्तियां कब तक पूरी होंगी। जवाब में महाधिवक्ता ने कहा कि 20 से 25 दिन में प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए झारखंड सरकार को चेतावनी दी कि 30 अक्टूबर तक नियुक्तियां हर हाल में कर लें अन्यथा कठोर आदेश पारित किए जाएंगे।
हर बार समय मांगती रही है सरकार
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभय मिश्रा ने अदालत को अवगत कराया कि हर बार राज्य सरकार समय मांगती रही है। कभी एक हफ्ता, कभी दो हफ्ता तो कभी एक महीने का… लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं। इस मामले में एडवोकेट एसोसिएशन, याचिकाकर्ता राजकुमार सहित कई याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को तय की है।

