कर्नाटक हाई कोर्ट ने रेपिडो, ओला और उबर को छह हफ्तों के भीतर बाइक टैक्सी सर्विस बंद करने का दिया आदेश…

कर्नाटक हाई कोर्ट ने रेपिडो, ओला और उबर को छह हफ्तों के भीतर बाइक टैक्सी सर्विस बंद करने का दिया आदेश…

जज ने सरकार को उचित दिशानिर्देश जारी करने तक बाइक टैक्सियों को चालू रखने से रोक दिया है और नए नियम बनाने का विकल्प खुला रखा है
हाई कोर्ट का बाइक टैक्सी सर्विस बंद करने का आदेश, याचिकाकर्ता ने परिवहन वाहनों के रूप में पंजीकरण की मांग की थी

बेंगलुरु(BENGLORE) : रेपिडो, ओला और उबर के लिए एक बुरी खबर है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने इन कंपनियों को छह हफ़्तों के अंदर बाइक टैक्सी सर्विस बंद करने का आदेश दिया है। जस्टिस बी.एम. श्याम प्रसाद ने यह फैसला 2022-23 में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। इन याचिकाओं में राज्य सरकार को एग्रीगेटर परमिट जारी करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने क्या कहा?
जज ने कर्नाटक सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता आदेश में दी गई समय सीमा के भीतर अपनी बाइक टैक्सी सेवाएं बंद कर दें। जज ने अपने आदेश में कहा कि जब तक राज्य सरकार मोटर वाहन अधिनियम की धारा 93 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत उचित दिशानिर्देश जारी नहीं करती, तब तक याचिकाकर्ता बाइक टैक्सी सेवाएं नहीं चला सकते। राज्य सरकार को उनकी एग्रीगेटर परमिट या लाइसेंस देने के आवेदनों पर विचार करने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता है।

हालांकि, जज ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के पास बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए दिशानिर्देश बनाने जैसे उपाय करने का विकल्प हमेशा खुला है। इसका मतलब है कि अगर सरकार चाहे तो भविष्य में बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए नए नियम बना सकती है।

याचिका में क्या की गई थी मांग
याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार से मोटर वाहन अधिनियम और नियमों के अनुसार मोटरसाइकिलों को पीले नंबर प्लेट वाले परिवहन वाहनों के रूप में पंजीकृत करने की अनुमति देने के लिए कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की थी। इसके अलावा, उन्होंने अधिकारियों से उनकी बाइक टैक्सी सर्विस के कारोबार में हस्तक्षेप न करने का भी निर्देश देने की मांग की थी। वे चाहते थे कि सरकार उनकी बाइक टैक्सी सर्विस को बिना किसी रुकावट के चलने दे।

कर्नाटक सरकार ने यह दिया तर्क
राज्य सरकार ने इन याचिकाओं का विरोध किया। सरकार का कहना था कि याचिकाएं टिकने वाली नहीं हैं, क्योंकि याचिकाकर्ता निजी स्वामित्व वाली मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल बाइक टैक्सी सर्विस चलाने के लिए कर रहे हैं। ये मोटरसाइकिलें तो उनके मालिकों के निजी इस्तेमाल के लिए हैं। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि ईमेल के जरिए भेजे गए आवेदन परिवहन विभाग को नहीं मिले। सरकार ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी योजना चलाने के लिए लाइसेंस के संबंध में निर्धारित अथॉरिटी को आवेदन जमा करने के लिए स्वतंत्र हैं, जिसे 2021 में अंतिम रूप दिया गया था।

राज्य सरकार ने आगे तर्क दिया कि कर्नाटक ऑन-डिमांड ट्रांसपोर्टेशन एग्रीगेटर रूल्स 2016 के तहत लाइसेंस देने के लिए दायर आवेदन पर विचार नहीं किया जा सकता है। उन्होने कहा कि मोटरसाइकिल टैक्सी एग्रीगेटर के लिए लाइसेंस देने का कोई प्रावधान नहीं है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 66 का जिक्र
राज्य सरकार ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता गैर-परिवहन दोपहिया वाहनों को परिवहन वाहनों के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। वे किराए के लिए पीछे एक सवारी ले जा रहे हैं, बिना उन्हें परिवहन वाहनों में बदले। सरकार का कहना है कि वे निजी वाहनों को कमर्शियल इस्तेमाल कर रहे हैं। मोटरबाइक का उपयोग करके राइड-शेयरिंग मॉडल को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 66 के तहत अनुमति नहीं है।
धारा 66 किसी भी वाहन को सार्वजनिक स्थान पर परिवहन वाहन के रूप में उपयोग करने की अनुमति नहीं देती है, सिवाय क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण या राज्य परिवहन प्राधिकरण द्वारा दिए गए या प्रतिहस्ताक्षरित परमिट के अनुसार। राज्य सरकार ने याचिकाओं को खारिज करने की मांग करते हुए यह तर्क दिया।

NEWSANP के लिए बेंगलुरु से ब्यूरो रिपोर्ट

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