पेयजल स्वच्छता विभाग के जल जीवन मिशन में हुए 23 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े की परतें रोज खुल रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दावा किया है कि गिरफ्तार कैशियर संतोष कुमार ने फर्जीवाड़े से हासिल सात करोड़ रुपए म्यूचुअल फंड और एफडी में निवेश किया था। संतोष ने जांच एजेंसी को यह जानकारी दी थी।
इस मामले में ईडी ने 14 अक्टूबर 2024 को झारखंड में 18 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान 55.08 लाख कैश, एफडी के कागजात और कई दस्तावेज जब्त किए थे। इसे एडजुकेडिंग अथॉरिटी के साथ साझा किया गया। आग्रह किया कि इसे जांच के लिए जब्त रखने का आदेश दिया जाए। एडजुकेटिंग अथॉरिटी ने मंजूरी दे दी है।
अथॉरिटी को दी रिपोर्ट में ईडी ने बताया है कि विभाग के तत्कालीन सचिव मनीष रंजन की पत्नी अनिता राज व मानस कुमार की ऑरेंज मीडिया इंफो प्रा. लि. कंपनी है। मानस निदेशक हैं। इस मामले में उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। इधर, ईडी ने प्रिंसिपल ऑडिटर जनरल को पत्र लिखकर ऑडिट रिपोर्ट भी मांगी है, ताकि पता चल सके कि कितनी की गड़बड़ी हुई है।
फर्जी बिल पास कराने के लिए 10 फीसदी तय थी कमीशन
जांच एजेंसी को पता चला है कि मार्च, 2020 में प्रभात कुमार सिंह के आदेश पर संतोष कुमार ने कुल छह चेक बनाए, जिनकी कुल राशि 2.71 करोड़ रुपए थी। उन्होंने तत्कालीन मंडल लेखाकार सुरेंद्र पाल मिंज (अब मृत) और प्रभात कुमार सिंह के साथ मिलकर इन चेकों पर अपने हस्ताक्षर किए। सभी के हस्ताक्षर के बाद वह फर्जी बिल और चेक पास कराने के लिए कोषागार कार्यालय, रांची ले गया। उसने पहले ही तत्कालीन कोषागार पदाधिकारी मनोज कुमार और तत्कालीन प्रधान लिपिक, कोषागार, रांची शैलेंद्र कुमार से बात कर ली थी कि फर्जी बिल और चेक पास कराने के लिए वह उन्हें 10% नकद कमीशन देगा। इस तरह कुल 2.71 करोड़ रुपए की राशि धोखाधड़ी से अपने और अपनी कंपनी मेसर्स रॉकड्रिल कंस्ट्रक्शन (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते में जमा करा ली।
NEWSANP के लिए रांची से ब्यूरो रिपोर्ट

