इसीएल के झांझरा प्रोजेक्ट मे करीब 120 करोड़ की लागत की लगभग डेढ़ लाख टन कोयले की हुई अवैध बिक्री, भाजपा नेता जीतेन्द्र तिवारी ने किया खुलासा…

इसीएल के झांझरा प्रोजेक्ट मे करीब 120 करोड़ की लागत की लगभग डेढ़ लाख टन कोयले की हुई अवैध बिक्री, भाजपा नेता जीतेन्द्र तिवारी ने किया खुलासा…

आसनसोल(ASANSOL): पश्चिम बंगाल का आसनसोल इलाका 13 हजार करोड़ का कोयला तस्करी के मामले मे पुरे देश मे चर्चित हुआ था। जिसका ट्रायल भी आसनसोल के स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चल रहा है। आरोपियों में उद्योगपति, इसीएल अधिकारी, सीआईएसएफ, सुरक्षा अधिकारी, पुलिस अधिकारी, कोयला तस्करआदि शामिल है। इसके बाद भी कोयला घोटाला नहीं रूका है। भाजपा जिलाध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्या और पूर्व विधायक सह पूर्व मेयर जितेन्द्र तिवारी ने विस्फोटक खुलासा किया। भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेस में उन्होंने कहा कि ईसीएल के झांझरा प्रोजेक्ट से डेढ़ लाख टन कोयले की अवैध बिक्री की गई है। जिसकी कीमत करीब 120 करोड़ रुपये होती है।

कोयले की ओवररिपोर्टिंग, चोरी-तस्करी के पहलू
पूर्व विधायक जितेंद्र तिवारी ने कहा कि विधायक सह तृणमूल जिलाध्यक्ष नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती के संरक्षण में झांझरा प्रोजेक्ट के महाप्रबंधक और एजेंटों की मिलीभगत से कोयले का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। दो तरीके से यह अवैध कारोबार चल रहा है। पहला ओवर रिपोर्टिंग और दूसरा पहलू है कोयला माफियाओं द्वारा कोयले की चोरी और तस्करी। कोयला कंपनियों पर अधिक से अधिक उत्पादन करने का दबाव होता है। इससे कंपनी के अधिकारियों का कैरियर जुड़ा होता है। वित्तीय माह मार्च तक टार्गेट हासिल करने के लिए जमकर उत्पादन होता है। अक्सर उत्पादन से अधिक कोयला कागजों में दिखा दिया जाता है। जिसकी आधिकारिक घोषणा कर दी जाती है। वाह-वाही लूटी जाती है। लेकिन इसका एक साइड इफेक्ट है। उत्पादित कोयले की बिक्री करनी होती है। इस भरपाई को पूरा करने के लिए अधिकारी दो तरीके अपनाते हैं। अप्रैल से शुरू होनेवाले महीनों में उत्पादन अधिक करते हैं। लेकिन कागजों पर कम दिखाते हैं। इससे भरपाई बैकलॉग की होती है।

दूसरा तरीका कोयले में मिलावट का है। कोयले के स्टॉक में पत्थर, छाई, राख और मिट्टी मिलाई जाती हैं। ग्राहकों को इसकी सप्लाई कर दी जाती है। कोयले की क्वालिटी प्रभावित हो जाती है। अधिकारियों की गर्दन बच जाती है। लेकिन इसके साइड इफेक्ट का रिजल्ट कंपनी को भोगना पड़ता है। ग्राहक अपने स्तर से कोयले की क्वालिटी की जांच करते हैं। निर्धारित क्वालिटी नहीं मिलने पर दो निर्णय होते हैं। या तो पूरी कीमत को पेंडिंग कर दी जाती है या फिर थर्ड पार्टी जांच के बाद इसकी कीमत निर्धारित होती है। दोनों ही मामलों में कोयला कंपनी को राजस्व का घाटा होता है। ईसीएल में इस तरह की घटनाएं अक्सर होती है. इसे रोकने के लिए कड़े प्रावधान हैं। कंपनी के स्टॉक की जांच दो स्तरों पर होती है। आंतरिक के साथ-साथ अन्य कंपनियों से टीम आती है। .जांच टीम में अलग-अलग कंपनियों के अधिकारी होते हैं। इस समय झांझरा प्रोजेक्ट के लिए तीन अधिकारियों की टीम तैनात की गई है। सीसीएल के बीएंडके क्षेत्र की कारो ओसीपी के सीनियर मैनेजर मुक्तेश प्रसाद, एसईसीएल के रायगढ़ क्षेत्र की जामपली ओसीपी के सर्वेयर तन्मय सांतरा और एसईसीएल के जेएंडके क्षेत्र की अमादांद ओसीपी के सर्वेयर मनीष जायसवाल शामिल हैं। इन्हें न सिर्फ कोयले के स्टॉक की मापी करनी है बल्कि प्राथमिक जांच क्वालिटी की भी करनी है।

झांझरा प्रोजेक्ट में हो रहा गोरखधंधा
पूर्व विधायक जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि यह सब कुछ झांझरा प्रोजेक्ट के साइडिंग से कराया जाता है। हर साल मार्च के महीने में कोयले के उत्खनन का हिसाब किया जाता है। इसमें उनकी चोरी पकड़ी ना जाए, इसलिए उन्होंने मेजिया थर्मल पावर प्लांट से कोल डस्ट मंगवाते है और वजन को सही रखने के लिए कोयले के साथ ब्लैक कोल डस्ट को मिला देते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक वे खामोश थे। हालांकि उस क्षेत्र से उनको पिछले कई महीनो से इस संदर्भ में शिकायत मिल रही थी। लेकिन पुख्ता सबूत के अभाव में उन्होंने इस विषय पर कुछ कहा नहीं था। लेकिन अब कोयले के साथ ब्लैक कोल डस्ट मिलाते हुए वीडियो सामने आया है। इसके अलावा और भी कई सबूत भाजपा के हाथ लगे हैं। जिस वजह से अब वह इस मामले में खुलकर सामने आ रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती सिर्फ पांडवेश्वर के विधायक नहीं है। वह इस जिले के तृणमूल अध्यक्ष भी हैं। इसलिए तृणमूल नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती के इस भ्रष्टाचार से पल्ला नहीं झाड़ सकती। उन्होंने कहा कि इस बारे में ईसीएल के सीएमडी, पुलिस आयुक्त सहित सभी शीर्ष अधिकारियों से शिकायत की जाएगी। उनकी मांग है कि जब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं होती, झांझरा प्रोजेक्ट के जनरल मैनेजर को क्लोज किया जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय आउट सोरशिंग कंपनी डे ग्रुप मीझिया थर्मल से राख लाने में मुख्य भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सीएमडी या पुलिस आयुक्त के स्तर से इन दोषियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई नहीं की जायेगी तो सीबीआई से जांच कराने की पहल की जायेगी।
जब जितेंद्र तिवारी से पूछा गया कि अतीत में देखा गया है कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारी यहां तक की सुरक्षा अधिकारी भी कोयला तस्करी से जुड़े पाए गए हैं, तो उन्होंने कहा कि अगर केंद्रीय सरकारी कर्मचारी या सीआईएसएफ के अधिकारी भी किसी अवैध कारोबार में जुड़े पाए गए हैं या उन पर आरोप लगा है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। तृणमूल जिस तरह से अपने लोगों को बचाने की कोशिश करती है, वैसी कोई कोशिश केंद्र सरकार द्वारा नहीं की जाती। उन्होंने साफ कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है।

भाजपा राष्ट्रीय संपदा की लूट नहीं करेगी बर्दाश्त
आसनसोल जिला भाजपा अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य ने भी झांझरा प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और उन्होंने भी इसमें पांडेश्वर के विधायक नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती की संलिप्तता का दावा किया। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा राष्ट्रीय संसाधनों की ऐसी चोरी बर्दाश्त नहीं करेगी और अगर इस पर रोक नहीं लगती है और स्थानीय पुलिस प्रशासन इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती है तो भाजपा आने वाले समय में बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगी। भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी ने तृणमूल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर कोयला, बालू तस्करी से होने वाली कमाई बंद हो जाए तो तृणमूल का सफाया हो जाएगा।

आरोपी विधायक ने आरोपों को बताया राजनीतिक स्टंट
पांडेश्वर के वर्तमान तृणमूल विधायक सह जिलाध्यक्ष नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती ने जितेंद्र तिवारी और भाजपा द्वारा लगाए गए सभी आरोपी को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा के पैरों तले राजनीतिक जमीन खिसकती जा रही है। इस वजह से वह सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी अवैध कारोबार के साथ ना तो उनका और ना ही तृणमूल के किसी भी कार्यकर्ता का कोई संबंध है। उन्होंने जितेंद्र तिवारी द्वारा लगाए गए आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि यह सभी आरोप उन्हें और उनकी पार्टी को बदनाम करने के लिए लगाया जा रहा है। ईसीएल अधिकारियों का पक्ष नहीं मिल पाया है।
अब पुलिस आयुक्त, ईसीएल के सीएमडी की बारी है। उन्हें इन तथ्यों की उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए। आरोपियों को जांच पूरी होने तक सेंसर किया जाना चाहिए। मिलनेवाले तथ्यों को एफआईआर का आधार बनाया जाये। सवाल उठता है कि क्या पुलिस कमिश्नर एफआईआऱ करेंगे? क्या सीएमडी अपना स्टैंड सार्वजननिक करेंगे? या सीबीआई को ही जीएम, विधायक, आउटसोर्स कंपनी का खुलासा करना होगा। .क्या कोयला तस्करी में पहली बार जेल जायेंगे कोई विधायक या साबित होगा यह कोरा राजनीतिक आरोप? इसके अंजाम के लिए समय का इंतजार करना होगा।

NEWSANP के लिए आसनसोल से अतीक रहमान की रिपोर्ट

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *