रांची(RANCHI): सियासत में ख़ामोशी कभी ज्यादा देर तक पसरी नहीं रह सकती बल्कि खलबली ही इसका असली मिजाज रहता है. बेशक यह छोटा या बड़ा ही क्यों न हो. सियासत कभी चुपचाप नहीं हो सकती, यहां अंदर ही अंदर खेल चलता रहता क्योंकि निशाने पर सत्ता रहती है.
झारखण्ड में मौजूदा हेमंत सरकार के विधानसभा में भारी बहुमत से जीत के बाद विपक्ष भाजपा भी सुस्त सारीखा ही नजर आती है. भाजपा उतने तेवर और मुख़ाल्फत सरकार की तो नहीं कर पा रही. अभी कुछ महीने पहले ही बाबूलाल को नेता प्रतिपक्ष चूना गया. अब बारी झारखण्ड बीजेपी के अध्यक्ष चुनने की है. जो लगातार लटकते और खिसकते ही जा रहा है, जिससे एक जीजाविषा भी हलक में बढ़ते जा रही है की आखिर झारखण्ड भाजपा का नया अध्यक्ष कौन होगा?. रेस में तो कई नये – पुराने और तजुर्बेकार नेता अपनी -अपनी दावेदारी जतला रहें है, जिनकी भी अपनी कसक और धड़कने रोज -रोज बढ़ते ही जा रही है.
सवाल है कि क्या भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने के बाद ही झारखण्ड भाजपा को नया प्रदेशअध्यक्ष मिलेगा, तो सच को नजदीक से देखे तो इशारा इसी ओर देखने को मिल रहा है.क्योंकि अध्यक्ष चुनाव में भी झारखण्ड बीजेपी पिछड़ते जा रही है.
बेशक हो हल्ला, अकबकाहट और बेचैनी अंदर -बाहर दिखलाई पड़ रही हो, लेकिन हकीकत की जमीन पर टटोल कर देखे तो बात कुछ अलग नजर आती है.
दरअसल,झारखण्ड भाजपा के संगाठनिक चुनाव में काफ़ी देरी हो रही है.बीते आठ महीने में सिर्फ बूथ स्तर पर ही चुनाव हो सके हैं.अभी मंडल स्तर पर चुनाव तो हुए ही नहीं हैं. राज्यभर में भाजपा के 515 मंडल है.इन मंडलो में आधे के चुनाव होने पर 26 संगठनिक जिलों के चुनाव होंगे. इन 26 में कम से कम 14 में चुनाव पूरा होने के बाद ही चयनित जिला अध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव करा पाएंगे.
यहां मंडल स्तर पर चुनाव में उभरे विवाद के बाद ही मामला लटकता और अटकता गया, नहीं तो अदूरनी सूत्रों के मुताबिक फरवरी में ही इसका लक्ष्य रखा गया था. भाजपा के सविधान के अनुसार आधे मंडल का चुनाव होने पर ही जिलाध्यक्ष के चुनाव कराये जाते है.
ठीक इसी तरह देशभर में संगठनिक राज्यों की संख्या 37 है.ऐसे में 19 राज्यों के अध्यक्ष मिलकर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करते है.
हालांकि, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कभी भी हो सकता है. ऐसे में झारखण्ड भाजपा का अध्यक्ष लगता है राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के बाद ही होगा.
लाजमी है कि जब तक झारखण्ड भाजपा अध्यक्ष के नाम का ऐलान नहीं हो जाता, तब तक इसे लेकर कयासों का बाजार गर्म रहेगा और दावेदारों के नाम उभर कर सामने आएंगे. लेकिन जो अभी मौजूदा हालात है इससे तो साफ है की अभी इंतजार कुछ दिन और करना होगा. चाहे कितनी भी बेचैनी और बेकरारी इसे लेकर हो.
NEWS ANP के लिए शिवपूजन सिंह की रिपोर्ट

