आलस से निकला आविष्कार, नालंदा के छात्र ने बना दिया घर का दिमाग…

आलस से निकला आविष्कार, नालंदा के छात्र ने बना दिया घर का दिमाग…

बिहार(BIHAR): अनिल आलोक बताते हैं कि इस आविष्कार की शुरुआत उनके आलस से हुई। हॉस्टल में रहते समय सर्दियों में रजाई से निकलकर लाइट या पंखा बंद करना उन्हें मुश्किल लगता था। इसी समस्या ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि क्यों न तकनीक से इसका हल निकाला जाए।

IIIT रांची के छात्र हैं अनिल
अनिल आलोक IIIT रांची में कंप्यूटर साइंस के छात्र हैं और जल्द ही छठे सेमेस्टर की पढ़ाई शुरू करने वाले हैं। वे जिला मुख्यालय बिहार शरीफ के वार्ड 33 महलपर के निवासी हैं।

डिवाइस का नाम रखा रोबो
अनिल ने अपने स्मार्ट ब्रेन डिवाइस का नाम रोबो रखा है। यह डिवाइस सीधे घर के पुराने स्विच बोर्ड में या उसके पास इंस्टॉल हो जाता है। इसके लिए घर में कोई बड़ा बदलाव करने की जरूरत नहीं होती।

आवाज से करता है काम
यह डिवाइस इंटरनेट ऑफ थिंग्स तकनीक पर आधारित है। जैसे ही आप कहते हैं Hey Robo turn off the fan, इसमें लगा माइक्रोफोन आवाज पहचानता है। माइक्रो कंट्रोलर रिले को सिग्नल भेजता है और पंखा या लाइट तुरंत बंद हो जाती है।

मोबाइल से भी पूरा कंट्रोल
रोबो डिवाइस में वाई फाई और ब्लूटूथ दोनों की सुविधा है। अगर आप घर से बाहर हैं और लाइट या गीजर ऑन रह गया है तो मोबाइल के जरिए कहीं से भी उसे बंद कर सकते हैं। यह डिवाइस बिजली की खपत पर भी नजर रखता है जिससे बिजली बिल कम किया जा सकता है।

कई बार फेल हुआ सिस्टम
अनिल बताते हैं कि इस प्रोटोटाइप को बनाने में एक महीने से ज्यादा समय लगा। कई बार कोडिंग में एरर आए, वायरिंग गलत हुई और शॉर्ट सर्किट से कंपोनेंट्स जल गए। करीब 5 से 6 हजार रुपए खर्च और कई सुधारों के बाद यह डिवाइस अब पूरी तरह स्थिर मोड में काम कर रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
इस इनोवेशन के लिए अनिल को भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित यूथ इनोवेशन चैलेंज डिजाइन फॉर भारत झारखंड चैप्टर में पहला पुरस्कार मिला। प्रतियोगिता में उन्होंने 57 प्रतिभागियों को पीछे छोड़ा।

नौकरी नहीं स्टार्टअप है सपना
अनिल का कहना है कि वे किसी बड़ी कंपनी में नौकरी नहीं करना चाहते। उनका सपना अपना स्टार्टअप शुरू कर लोगों को रोजगार देना है। वे चाहते हैं कि स्मार्ट होम तकनीक सिर्फ अमीरों तक सीमित न रहे बल्कि आम मध्यमवर्गीय परिवार भी इसका लाभ उठा सके।

AI से और होगा स्मार्ट
भविष्य में अनिल इस डिवाइस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले समय में यह डिवाइस आपकी आदतों और मौसम को समझकर खुद ही गीजर या अन्य उपकरण चालू कर सकेगा।

परिवार को है बेटे पर गर्व
अनिल के पिता शैलेंद्र प्रसाद और मां आशा सिन्हा जो एक शिक्षिका हैं, अपने बेटे की इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। अनिल चार भाई बहनों में सबसे छोटे हैं और शुरू से ही मेधावी छात्र रहे हैं।

NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

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