जामा मस्जिद से उठी एकजुटता की आवाज, गूंजे “भारत माता की जय” के नारे
जामताड़ा(JAMTADA):कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले ने देशभर में आक्रोश की लहर दौड़ा दी है। इसी क्रम में झारखंड के मिहिजाम नगर में भी भारी जनाक्रोश देखने को मिला, जहां मुस्लिम समुदाय के नेतृत्व में आतंकवाद के खिलाफ एक विशाल विरोध रैली का आयोजन किया गया। इस रैली ने ना सिर्फ आतंक के विरुद्ध जनभावनाओं को स्वर दिया, बल्कि भारत की एकता और अखंडता के प्रति समाज की सामूहिक प्रतिबद्धता को भी उजागर किया।
जामा मस्जिद से निकली जनभावना की मशाल
शुक्रवार नमाज़ अता करने के बाद जामताड़ा के मिहिजाम मस्जिद रोड की जामा मस्जिद से सैकड़ों लोगों की भीड़ नारेबाजी करते हुए निकला। रैली की अगुवाई मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद इरशाद आलम कर रहे थे। उनके साथ बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक, समाजसेवी और युवा मौजूद थे, जिनके हाथों में तिरंगा, विरोधात्मक पोस्टर और शांति का संदेश देने वाले बैनर थे।
रैली मस्जिद रोड से गुजरती हुई मिहिजाम रेलवे एक नंबर गेट से होते हुए इंदिरा चौक पहुंची। इस पूरे मार्ग में “पाकिस्तान मुर्दाबाद”, “भारत माता की जय”, “आतंकवाद को जड़ से मिटाओ” जैसे बुलंद नारों से माहौल गूंज उठा।
इंदिरा चौक पर पाकिस्तान का प्रतीकात्मक पुतला दहन
प्रदर्शनकारियों ने इंदिरा चौक पर पाकिस्तान सरकार के प्रतीकात्मक पुतले का दहन किया, जिसे उन्होंने भारत विरोधी गतिविधियों का प्रतीक बताया। जैसे ही आग की लपटें उठीं, लोगों ने एक स्वर में पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आतंकवाद के समूल विनाश की मांग की।
इस अवसर पर बोलते हुए मोहम्मद इरशाद आलम ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा –
“पाकिस्तान एक आतंक पोषक राष्ट्र है, जिसने भारत में शांति और सौहार्द को बार-बार निशाना बनाया है। अब भारतवासी चुप नहीं रहेंगे। प्रधानमंत्री के आदेश मात्र से पाकिस्तान का नामो-निशान मिटा दिया जाएगा।”
सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बना विरोध प्रदर्शन
यह रैली केवल एक विरोध का माध्यम नहीं थी, बल्कि धर्मनिरपेक्ष भारत की एक सशक्त तस्वीर भी थी। विशेष बात यह रही कि विरोध प्रदर्शन में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी वर्गों के लोगों ने भाग लिया। इससे यह संदेश स्पष्ट हो गया कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और भारत की जनता इसके खिलाफ एकजुट है।
विरोध रैली में मोहम्मद परवेज रहमान, जावेद अंसारी, यासर नवाज, सफीक शेख, गुलाम नबी, काशिफ इकबाल, फैज अली सहित कई सक्रिय नागरिक शामिल थे। इन सभी ने आतंकवाद के विरुद्ध संगठित स्वर उठाते हुए शांति, एकता और अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता जताई।
प्रशासन भी रहा सतर्क, रही पूरी निगरानी
पूरे प्रदर्शन के दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल सक्रिय रहा। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिसबल ने रैली मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण ढंग से संचालित किया।
प्रशासन ने प्रदर्शन के बाद अपने बयान में कहा –
“शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु प्रशासन सजग रहा। जनता के आक्रोश को समझा गया और उचित ढंग से उन्हें अपना विरोध व्यक्त करने का अवसर मिला।”
निष्कर्ष: आतंकवाद के खिलाफ एकजुट भारत की तस्वीर
मिहिजाम की यह रैली केवल एक क्षेत्रीय विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति थी। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि भारत की जनता अब आतंकवाद के विरुद्ध केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि एकजुट प्रतिरोध की भावना रखती है। मिहिजाम ने इस विरोध से न सिर्फ एक उदाहरण प्रस्तुत किया, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि भारत के नागरिक, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर, देश की संप्रभुता के लिए एक साथ खड़े हैं।
NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

