धनबाद(DHANBAD): दिवाली का त्योहार देश के हर हिस्से में धूम-धाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. यह पर्व हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है. इस साल 31 अक्टूबर यानी की आज दिवाली का त्योहार सेलिब्रेट किया जा रहा है. इस पावन अवसर पर लोग अपने घरों को दीपक, मोमबत्तियों और रंग-बिरंगी लाइट्स की रोशनी से उजागर करते हैं. जिसकी तैयारी काफी पहले से ही शुरु हो जाती है.
दिवाली की तैयारियां कई दिनों पहले से शुरू हो जाती हैं. लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और दिवाली के अवसर के लिए नए-नए कपड़े खरीदते हैं. दिवाली के समय मार्केट की रौनक बढ़ जाती है. मिठाई की दुकानों से लेकर कपड़ों और सजावट के सामान की दुकानों पर भीड़ देखने को मिलती है. दिवाली के दिन लोग एक दूसरे को मिठाईयां और तोहफे बांटते हैं और एक दूसरे को बधाई देते हैं. अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को भी घर बैठे मोबाइल के जरिए शुभकामनाएं संदेश भेजे जाते हैं.

2024 में दिवाली मनाने का उत्तम समय
दिवाली या दीपावली कब मनाई जाएगी, इस बात को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति है. कुछ लोगों का मानना है कि दिवाली का पर्व 31 अक्टूबर को मनाना सही रहेगा तो कुछ 1 नवंबर को मनाने की बात कह रहे हैं. जबकि दिवाली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 12 मिनट से प्रारंभ होगी और 01 नवंबर को शाम 05 बजकर 53 मिनट तक रहेगी. दिवाली के त्योहार में उदया तिथि नहीं, बल्कि प्रदोष काल का विचार किया जाता है. प्रदोष काल 31 अक्टूबर को ही मिल रहा है, 1 नवंबर को नहीं. इसलिए दिवाली का त्योहार 31 अक्टूबर को मनाना उत्तम रहेगा.
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, माता लक्ष्मी अमावस्या तिथि में प्रदोष काल और निशीथ काल में भ्रमण करती हैं. इसके कारण माता की पूजा प्रदोष काल और निशीथ काल में की जाती है. पंचांग के मुताबिक 31 अक्तूबर, गुरुवार के दिन पूरी रात्रि अमावस्या तिथि के साथ प्रदोष काल और निशीथ मूहूर्त काल भी है. ऐसे में 31 अक्टूबर के दिन दीवाली का पर्व और लक्ष्मी पूजन करना सबसे उत्तम होगा

दिवाली 2024 प्रदोषकाल मुहूर्त
दिवाली पर देवी लक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) और स्थिर लग्न में किया जाना चाहिए. अमूमन दिवाली पर स्थिर लग्न जरूर मिलता है. दिवाली पर जब वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि लग्न में उदित हों तब माता लक्ष्मी का पूजन किया जाना चाहिए. क्योंकि ये चारों राशि स्थिर स्वभाव की होती हैं. स्थिर लग्न के समय माता लक्ष्मी की पूजा करने से माता लक्ष्मी अंश रूप में घर में ठहरती हैं. प्रदोष काल का समय हर दिन सूर्यास्त होने से 2 घड़ी यानी 48 मिनट तक रहता है.
दिवाली 2024 अमावस्या तिथि
कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारंभ- 31 अक्तूबर को दोपहर 03:12 मिनट से.
कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्त- 01 नवंबर को शाम 05:53 मिनट तक.
दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त
प्रदोष काल में पूजा मुहूर्त: 31 अक्टूबर 2024, शाम 05 बजकर 45 मिनट से 07 बजकर 48 मिनट तक.
वृषभ काल पूजा मुहूर्त: 31 अक्टूबर 2024, शाम 06 बजकर 38 मिनट से रात 08 बजकर 10 मिनट तक.
निशिता काल पूजा मुहूर्त: 31 अक्टूबर 2024, रात 11 बजकर 40 मिनट से देर रात 01 बजकर 56 मिनट तक.
दिवाली 2024 के दिन का चौघड़िया
शुभ-उत्तम मुहूर्त: 06:31 ए एम से 07:54 ए एम तक
चर-सामान्य मुहूर्त: 10:39 ए एम से 12:01 पी एम तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: 12:01 पी एम से 01:23 पी एम तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 01:23 पी एम से 02:46 पी एम तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त: 04:08 पी एम से 05:31 पी एम तक
दिवाली की रात का चौघड़िया
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 05:31 पी एम से 07:08 पी एम तक
चर-सामान्य मुहूर्त: 07:08 पी एम से 08:46 पी एम तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: 12:01 ए एम से 01:39 ए एम, 1 नवंबर तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त: 03:17 ए एम से 04:55 ए एम, 1 नवंबर तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 04:55 ए एम से 06:32 ए एम, 1 नवंबर तक
NEWSANP के लिए धनबाद से रागिनी पांडेय की रिपोर्ट

