आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने पंचायती राज प्रतिनिधियों के लिए पांच दिवसीय नेतृत्व और प्रबंधन विकास कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया…

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने पंचायती राज प्रतिनिधियों के लिए पांच दिवसीय नेतृत्व और प्रबंधन विकास कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया…

धनबाद(DHANBAD):भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स), धनबाद ने भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों की क्षमताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक पांच दिवसीय नेतृत्व और प्रबंधन विकास कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया।

समापन सत्र TEXMiN स्मार्ट क्लासरूम में आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के रजिस्ट्रार और आईआईटी (आईएसएम) के पूर्व छात्र (बी.टेक, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग, 1993) श्री अमिताभ रंजन ने मुख्य भाषण दिया। हाल ही में सोलर फ्यूचर अलायंस की सलाहकार समिति में नियुक्त किए गए श्री रंजन ने ग्रामीण विकास, शासन की चुनौतियों और स्थानीय संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए रणनीतिक समाधानों पर एक विचारोत्तेजक व्याख्यान दिया।

तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड से आए प्रतिभागियों ने सफलता की कहानियाँ साझा कीं, जिससे पारस्परिक सीख और सहयोग को बढ़ावा मिला। इस सत्र में दीप्ति लेडीज क्लब की अध्यक्ष शकुंतला मिश्रा और खनन नीति विशेषज्ञ एवं माइन लाइन प्रा. लि. की प्रबंध निदेशक सुश्री नंदिनी चक्रवर्ती भी उपस्थित थीं। उन्होंने प्रतिभागियों से संवाद किया और साझा सीखने के महत्व पर बल दिया।

कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन की डीन और कार्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर रजनी सिंह ने प्रतिभागियों को समुदायों में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया, जो विशेष रूप से महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाले सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप है।

आईआईटी (आईएसएम) में कौशल विकास कार्यक्रम के समन्वयक सुनील कुमार ने “स्किल इंडिया” पहल के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे यह पहल लाखों लोगों को व्यावसायिक कौशल में प्रशिक्षित कर सामाजिक-आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के माध्यम से कार्य कर रही है।

कार्यक्रम में नेतृत्व, टीमवर्क, ग्रामीण तकनीक, वित्तीय शासन और परियोजना निगरानी पर सत्रों के साथ-साथ झरिया कोलफील्ड, मैथन डैम और आईआईटी (आईएसएम) की उन्नत प्रयोगशालाओं का फील्ड विज़िट भी शामिल था।

यह पहल ग्रामीण विकास और क्षमता निर्माण के प्रति आईआईटी (आईएसएम) की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जमीनी स्तर के नेताओं को सशक्त बनाकर संस्थान विकसित भारत — एक समावेशी और सतत भारत — की परिकल्पना में सार्थक योगदान दे रहा है।

NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

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