
जामताड़ा(JAMTADA):अहिल्याबाई होल्कर : इतिहास की एक दीपशिखा, आज की नारी शक्ति की प्रेरणा
अहिल्याबाई होल्कर का नाम भारतीय इतिहास में एक ऐसी महिला के रूप में दर्ज है, जिन्होंने न केवल अपने राज्य को सुशासित किया, बल्कि सामाजिक सुधारों की मिसाल भी कायम की। वे 18वीं शताब्दी में मालवा राज्य की रानी बनीं, लेकिन एक सामान्य गृहिणी से लेकर एक सक्षम प्रशासक तक का उनका सफर अपने आप में अद्वितीय है। उनके पति खांडेराव होल्कर के निधन के बाद, वे विधवा होने के बावजूद शासन में सक्रिय रहीं और अपने ससुर मल्हारराव होल्कर के मार्गदर्शन में राज्य संचालन का गुर सीखा।
जब राज्य संकट में था, तब अहिल्याबाई ने साहस के साथ शासन संभाला और जनता की सेवा को ही अपना धर्म माना। उन्होंने न्यायप्रिय, दयालु और प्रजावत्सल शासक के रूप में ख्याति पाई। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने धर्म और समाज के उत्थान को शासन का मुख्य आधार बनाया। वे काशी, गया, सोमनाथ, रामेश्वरम जैसे तीर्थस्थलों पर मंदिरों का पुनर्निर्माण कर संस्कृति की रक्षा में अग्रणी बनीं।
आज जब भारत नारी सशक्तिकरण की दिशा में अग्रसर है, तब अहिल्याबाई का जीवन आधुनिक महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आता है। वे हमें यह सिखाती हैं कि महिला चाहे किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो, अगर उसमें संकल्प और संवेदना हो, तो वह समाज को दिशा दे सकती है।
जामताड़ा में जयंती की तैयारियाँ : नारी शक्ति के गौरव को समर्पित उत्सव
जामताड़ा जिले के मिहिजाम में भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की विशेष बैठक इसी भावना को प्रकट करने के लिए आयोजित की गई। इस बैठक में आगामी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती को भव्य एवं उद्देश्यपूर्ण ढंग से मनाने की रूपरेखा तैयार की गई।
बैठक में मुख्य अतिथि प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष आरती सिंह ने अहिल्याबाई के जीवन को नारी सम्मान का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनकी जयंती केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का उत्सव है। उन्होंने कहा कि महिला मोर्चा इस आयोजन के जरिए समाज में यह संदेश देना चाहता है कि महिलाएं नेतृत्व, सेवा और संस्कृति की वाहक होती हैं।
बैठक की अध्यक्षता कर रहीं जिला अध्यक्ष पुष्पा सोरेन ने बताया कि जयंती समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, महिला जागरूकता अभियानों, सामाजिक सेवा कार्यों और सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रतियोगिताओं और स्थानीय कलाकारों को मंच देने की योजना भी तैयार की गई है।
बबीता झा, महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज की महिलाओं को अहिल्याबाई के आदर्शों पर चलकर समाज में नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह आयोजन महिलाओं को संगठित करने और उन्हें सामाजिक बदलाव की दिशा में प्रेरित करने का माध्यम बनेगा।
बैठक में अन्य प्रमुख सदस्य – कमल गुप्ता, लोकेश महतो, अनीता शर्मा, रंजू देवी और परिचय मंडल आदि उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन को जनसहभागिता से सफल बनाने पर बल दिया।
इतिहास से प्रेरणा, वर्तमान के लिए संकल्प
अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती केवल अतीत के गौरव की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की नारी शक्ति को सम्मान और मार्गदर्शन देने का अवसर है। जिस तरह उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी सामाजिक न्याय, महिला गरिमा और धार्मिक पुनरुत्थान के कार्य किए, वह आज के भारत के लिए आदर्श हैं।
जामताड़ा में महिला मोर्चा की यह बैठक साबित करती है कि जब महिलाएं संगठित होती हैं और ऐतिहासिक प्रेरणा को वर्तमान संदर्भों से जोड़ती हैं, तो समाज में न केवल चेतना जागती है, बल्कि बदलाव की एक नई लहर भी उठती है।
अहिल्याबाई होल्कर की जयंती का यह आयोजन—नारी शक्ति का गौरवगीत है, जो इतिहास से वर्तमान तक गूंजता रहेगा।
NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

