अमित शाह चाह भी लें तो नीतीश कुमार नहीं छोड़ेंगे ‘कुर्सी’, बिहार में ‘इच्छात्याग’ से पहले BJP का सपना बेकार!….

अमित शाह चाह भी लें तो नीतीश कुमार नहीं छोड़ेंगे ‘कुर्सी’, बिहार में ‘इच्छात्याग’ से पहले BJP का सपना बेकार!….

पटना(PATNA): केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की एक बातचीत को लेकर बिहार का सियासी माहौल इस कड़ाके की ठंड में भी गरमा गया है। हालांकि चुनावी तैयारियों के सिलसिले में पहले से ही सभी पार्टियां इस कदर रेस हैं कि चुनाव जैसी तपिश का सर्दी में भी एहसास हो रहा है। आरजेडी के सीएम फेस तेजस्वी यादव ने रुक-रुक कर ही सही, जिलों का दौरा जारी रखा है। बड़ी-बड़ी योजनाओं की वे घोषणा कर रहे हैं। जेडीयू के नेताओं का भी जिलों में कार्यक्रम चल रहा है। उपेंद्र कुशवाहा अलग अपनी यात्रा से अलख जगाए हुए हैं। चिराग पासवान का भी मन दिल्ली में रम नहीं रहा। वे तो बिहार में विधायक बनने का सपना देख रहे हैं। 15 जनवरी से एनडीए के तमाम घटक दलों के नेताओं का सामूहिक दौरा होने वाला है। पर, अमित शाह की बातों ने सबको सकते में डाल दिया है।…

नीतीश के CM फेस पर शाह ने क्या कहा

अमित शाह ने बिहार में एनडीए के बाबत तीन खास बातें कहीं। उनकी पहली बात थी कि बिहार में एनडीए के सीएम फेस का फैसला संसदीय बोर्ड और संबंधित दल लेंगे। यानी नीतीश कुमार ही सीएम फेस होंगे, यह तय नहीं है। दूसरी बात कही कि कोई लाख कोशिश करे, एनडीए एकजुट है। अभी तक तो ऐसा ही लग रहा है। उनकी तीसरी और चौंकाने वाली बात ऐसी रही, जिसकी कल्पना भी जेडीयू फिलवक्त कर नहीं सकता है।…

भाजपा के प्रदेश स्तरीय नेताओं की समझ में भी यह बात नहीं आ रही होगी। दूसरे सियासी दल और पंडित इसके मायने निकालने की कोशिश जरूर कर रहे होंगे। राजनीति में थोड़ी भी जिनकी रुचि है, वे भी मायने निकालने के लिए माथापच्ची कर रहे होंगे। शाह ने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा ज्यादा सीटें लाकर बड़ी पार्टी बनी तो उसके सीएम बनाए गए। इसमें किसी को एतराज नहीं होना चाहिए। उनके इसी कथन में छिपा है बिहार का रहस्य, जिसने बिहार की सियासत को सस्पेंस में डाल दिया है।…

नीतीश के लिए इस बयान के मायने?

2020 में नीतीश कुमार एनडीए के बैनर तले ही चुनाव लडे थे। एनडीए में अकेले 74 सीटें जीत कर अव्वल बनी भाजपा ने सिर्फ 43 सीटें जीतने वाले जेडीयू के नेता नीतीश कुमार को मिन्नतें कर सीएम बनाया। विधानसभा में तीसरे नंबर की पार्टी के नेता नीतीश सीएम बन गए। महाराष्ट्र के बारे में अमित शाह ने अपना स्टैंड स्पष्ट कर बिहार के लिए एनडीए के सीएम चयन का सलीका बता दिया है। यानी इसका यह अर्थ निकलता है कि एनडीए को फिर सरकार बनाने का मौका मिला तो सीएम बड़ी पार्टी का ही बनेगा। क्या 2020 जैसी स्थिति आ गई तो नीतीश सीएम नहीं बनेंगे?नीतीश क्या इसके लिए तैयार होंगे?…

नीतीश कुमार का अब तक जैसा मन-मिजाज रहा है, उसे देख कर तो नहीं लगता कि वे सीएम की कुर्सी बगैर रह पाएंगे। कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए तो वे कभी एनडीए और कभी महागठबंधन में आवाजाही करते रहे हैं। कुर्सी बचाने के लिए ही वे तेजस्वी के नेतृत्व में 2025 में चुनाव लड़ने की बात कह कर पलट गए। एनडीए के साथ जाकर उन्होंने यह नौबत ही नहीं आने दी। इसलिए नहीं लगता कि वे भाजपा से कम सीटें लाकर भी सीएम की कुर्सी के लिए तिकड़म से परहेज करेंगे। 2020 जैसी स्थिति रही, तब भी वे किंगमेकर बनने के बजाय किंग ही बनने की कोशिश करेंगे। उनके लिए सहूलियत है कि इंडिया ब्लाक भी हमेशा उनकी अगवानी के लिए पलक पांवड़े बिछाए रहता है।…

BJP के पहले के स्टैंड से मेल नहीं!

भाजपा के प्रादेशिक नेता भी अमित शाह के कथन से भौंचक हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत न मिलने पर जब नीतीश के सहयोग से नरेंद्र मोदी ने सरकार बनाई, तभी से प्रदेश स्तर के नेता नीतीश कुमार के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ने का राग अलापते रहे हैं। नीतीश को 2025 में भी सीएम बनाने का संकल्प दोहराते रहे हैं। अब वे क्या कहेंगे। भाजपा कोटे से उपमुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी ने भी नीतीश की कुर्सी सलामत रखने के लिए सिर पर बंधी पगड़ी उतार दी। उन्हें सीएम की कुर्सी से उतारने का संकल्प वापस ले लिया। असहमति के बावजूद विजय सिन्हा भी नीतीश का गुणगान करने लगे। अब उन्हें भी शाह की बातों का अर्थ समझने में पसीने छूट रहे होंगे।….

ऐसा हो गया तो क्या करेंगे नीतीश

यद्यपि अभी यह मान लेना मुश्किल है कि अमित शाह ने जो कहा, वह बिहार में लागू ही होगा। इसलिए कि केंद्र में भाजपा को नीतीश के सहयोग की जरूरत है। वक्फ संशोधन बिल और वन नेशन, वन इलेक्शन जैसे कई विधेयक पास कराने में नीतीश की मदद चाहिए। बहरहाल, ऐसा हुआ भी तो नीतीश 2022 वाली रणनीति अपना लेंगे, जिससे कुर्सी सलामत रहे। इंडिया ब्लाक में उनकी वापसी की कोशिशें भी होती रही हैं। सीएम फेस बने तेजस्वी को भी उनकी मातहती में काम करने से एतराज कभी नहीं रहा है। हां, नीतीश एक ही स्थिति में अपनी कुर्सी छोड़ सकते हैं, जब वे खुद इसके लिए तैयार हों।…

NEWSANP के लिए पटना से ब्यूरो रिपोर्ट

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *