बिहार(BIHAR): आज संसद में पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। विशेष रूप से 202 सीटों के साथ सत्ता में लौटी एनडीए (NDA) सरकार से बिहार को इस बार असाधारण उम्मीदें हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि गठबंधन की राजनीति के इस दौर में बिहार को ‘विशेष सौगात’ मिल सकती है।
औद्योगिकीकरण और निवेश की आस
बिहार की सबसे बड़ी मांग इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और नए उद्योगों की स्थापना है। राज्य सरकार और जनता को उम्मीद है कि केंद्र सरकार बिहार में निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष रियायतें और आर्थिक पैकेज की घोषणा करेगी। बंद पड़ी चीनी मिलों के पुनरुद्धार और एथेनॉल हब बनाने के लिए बड़ी राशि का प्रावधान किया जा सकता है।
एक्सप्रेस-वे और इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
कनेक्टिविटी के मामले में बिहार अब भी अन्य विकसित राज्यों से पीछे है। इस बजट में पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे और रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भारी फंड मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क नेटवर्क न केवल यात्रा सुगम बनाएगा, बल्कि व्यापार के नए रास्ते भी खोलेगा।
बैंकिंग और ऋण (Loan) की सुविधा
बिहार में ‘क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो’ (CD Ratio) हमेशा एक मुद्दा रहा है। राज्य को उम्मीद है कि केंद्र बैंकों को निर्देश देगा कि बिहार के युवाओं, किसानों और उद्यमियों को आसानी से और ज्यादा लोन उपलब्ध कराया जाए। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को बढ़ावा मिलेगा और पलायन में कमी आएगी।
बिहार के पास इस बार ‘किंगमेकर’ की भूमिका में होने के कारण मोलभाव की शक्ति अधिक है। क्या वित्त मंत्री बिहार की इन लंबी मांगों को बजट के पिटारे से पूरा करेंगी? यह देखना दिलचस्प होगा।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

